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‘जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा’: मौलाना महमूद मदनी कौन हैं, जिनके बयान ने मचाया सियासी बवाल?

‘जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा’: मौलाना महमूद मदनी कौन हैं, जिनके बयान ने मचाया सियासी बवाल?

नई दिल्ली: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद असद मदनी एक प्रमुख इस्लामी विद्वान और मुस्लिम संगठनों के प्रभावशाली नेता हैं, जिनके हालिया ‘जिहाद’ वाले बयान ने देशभर में हंगामा मचा दिया है। 29 नवंबर 2025 को भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गवर्निंग बॉडी मीटिंग के दौरान दिए गए उनके बयान पर बीजेपी, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और अन्य संगठनों ने तीखा विरोध जताया है। मदनी ने सुप्रीम कोर्ट और सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर जुल्म होगा तो जिहाद होगा, और कोर्ट को ‘सुप्रीम’ कहलाने का हक तभी है जब वह संविधान का पालन करे। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जहां #ArrestMadani जैसे ट्रेंड चल रहे हैं।

कौन हैं मौलाना महमूद मदनी?

मौलाना महमूद असद मदनी का जन्म 1958 में दिल्ली के एक प्रमुख धार्मिक परिवार में हुआ। वे दारुल उलूम देवबंद के पूर्व चांसलर मौलाना असद मदनी के बेटे हैं, जो जमीयत उलेमा-ए-हिंद के संस्थापक सदस्य थे। मदनी ने इस्लामी शिक्षा दारुल उलूम देवबंद से प्राप्त की और 2006 से जमीयत उलेमा-ए-हिंद (जेयूएच) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। यह संगठन 1919 में स्थापित भारत का सबसे बड़ा मुस्लिम धार्मिक संगठन है, जो मुस्लिम हितों की रक्षा, शिक्षा और सामाजिक न्याय पर फोकस करता है। मदनी को ‘मौलाना साहब’ के नाम से जाना जाता है और वे अक्सर अल्पसंख्यक अधिकारों, वक्फ संपत्तियों और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों पर बोलते हैं। वे ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) से भी जुड़े रहे हैं।

मदनी का राजनीतिक रुख हमेशा विवादास्पद रहा है। वे कांग्रेस के करीब माने जाते हैं और 2019 लोकसभा चुनावों में मुस्लिम वोटों के एकजुट होने की अपील कर चुके हैं। हालांकि, वे कभी-कभी सरकार की नीतियों की आलोचना भी करते हैं, जैसे CAA-NRC और ट्रिपल तलाक बिल पर। उनकी छवि एक कट्टरपंथी सुधारवादी की है, जो जिहाद को ‘समाज सुधार’ के रूप में पेश करते हैं।

विवादित बयान: क्या कहा मौलाना मदनी ने?

भोपाल में जेयूएच की बैठक में मदनी ने कहा, “एक समुदाय को हमेशा निशाना बनाया जा रहा है। अगर जुल्म होगा, तो जिहाद होगा। जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा।” उन्होंने जिहाद को ‘पवित्र’ शब्द बताते हुए कहा कि यह ‘लव जिहाद’, ‘स्पिट जिहाद’ जैसे शब्दों से अपमानित हो रहा है। मदनी ने सुप्रीम कोर्ट पर भी निशाना साधा: “सुप्रीम कोर्ट को ‘सुप्रीम’ कहलाने का हक तभी है जब वह संविधान का पालन करे। बाबरी मस्जिद और ट्रिपल तलाक जैसे फैसलों से लगता है कि कोर्ट सरकार के दबाव में है।” उन्होंने दावा किया कि 10% लोग मुसलमानों के पक्ष में, 30% विरोध में और 60% चुप हैं—इन चुप्पी वालों को जगाना जरूरी है।

मदनी ने कहा कि जिहाद का मतलब ‘दूसरों की भलाई और कल्याण’ है, न कि हिंसा। लेकिन उनके बयान को हिंसा भड़काने वाला माना गया। X (पूर्व ट्विटर) पर वीडियो वायरल हो गया, जहां यूजर्स ने इसे ‘देशद्रोह’ कहा।

बवाल क्यों मचा? प्रतिक्रियाएं

वीएचपी का पलटवार: राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, “मदनी मुसलमानों को ‘जिहादी’ बता रहे हैं और गैर-मुस्लिमों को ‘मुर्दा कौम’। यह युवाओं को भड़काने वाला है। स्वतंत्रता सेनानियों और सैनिकों को भी जिहादी कहेंगे?” वीएचपी ने सख्त कार्रवाई की मांग की।

बीजेपी का हमला: बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा, “भारत ‘जिहादी मानसिकता’ को कुचल देगा।” नरोत्तम मिश्रा ने पूछा, “बम धमाकों और जिहाद की जिम्मेदारी कौन लेगा?” संबित पात्रा ने सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की।

मुस्लिम संगठनों की आलोचना: ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के प्रमुख मौलाना शाहबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा, “मदनी मुसलमानों को भड़का रहे हैं। करोड़ों मुसलमान सुप्रीम कोर्ट, संसद और सरकार पर भरोसा करते हैं। धार्मिक नजरिए से बोलें।”

सोशल मीडिया पर हंगामा: X पर #ArrestMadani ट्रेंड कर रहा है। एक यूजर ने कहा, “यह देशद्रोह है, अमित शाह को संज्ञान लेना चाहिए।” एक अन्य ने समर्थन में लिखा, “जुल्म के खिलाफ जिहाद सही है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि मदनी का बयान अल्पसंख्यक असुरक्षा की भावना को दर्शाता है, लेकिन यह सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकता है। जमीयत ने अभी कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। यह विवाद 2024 के वक्फ बिल और कोर्ट फैसलों के संदर्भ में और भड़क सकता है।

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