ऐपल पर भारत में 3.4 लाख करोड़ का संभावित झटका: ग्लोबल टर्नओवर पर जुर्माने के खिलाफ कोर्ट पहुंची कंपनी, पूरी सच्चाई चौंकाएगी
ऐपल पर भारत में 3.4 लाख करोड़ का संभावित झटका: ग्लोबल टर्नओवर पर जुर्माने के खिलाफ कोर्ट पहुंची कंपनी, पूरी सच्चाई चौंकाएगी
अमेरिकी टेक दिग्गज ऐपल की भारत में मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के नए एंटीट्रस्ट नियम के खिलाफ कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला ऐप स्टोर की नीतियों से जुड़ा है, जहां ऐपल पर आरोप है कि वह अपनी बाजार वर्चस्व का दुरुपयोग कर डेवलपर्स को लूट रही है। अगर नियम लागू रहा, तो ऐपल को ग्लोबल टर्नओवर के 10% तक का जुर्माना झेलना पड़ सकता है—यानी करीब 3.4 लाख करोड़ रुपये (38 बिलियन डॉलर)! यह राशि भारत की कॉर्पोरेट हिस्ट्री की सबसे बड़ी पेनल्टी हो सकती है, लेकिन अभी यह सिर्फ संभावना है।
कहानी की शुरुआत 2022 से हुई, जब टिंडर की पैरेंट कंपनी मैच ग्रुप और कई भारतीय स्टार्टअप्स ने सीसीआई में शिकायत दर्ज की। आरोप था कि ऐपल iOS ऐप स्टोर पर ‘अपमानजनक प्रथाओं’ का सहारा ले रही है। डेवलपर्स को ऐप बेचने या इन-ऐप खरीदारी के लिए ऐपल की इन-ऐप परचेज सिस्टम इस्तेमाल करना पड़ता है, जहां कंपनी 30% तक कमीशन वसूलती है। थर्ड-पार्टी पेमेंट सिस्टम की अनुमति नहीं, जो बाजार में प्रतिस्पर्धा को दबाता है। 2024 में सीसीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट जारी की, जिसमें ऐपल को ‘मार्केट डोमिनेंस का एब्यूज’ पाया गया। लेकिन अंतिम फैसला और पेनल्टी बाकी है।
समस्या तब बढ़ी जब 2023-24 में भारत ने कॉम्पिटिशन एक्ट में संशोधन किया। पहले जुर्माना सिर्फ भारत के टर्नओवर पर आधारित होता था, लेकिन अब सीसीआई ग्लोबल टर्नओवर पर 10% तक लगा सकती है। ऐपल का 2024 ग्लोबल रेवेन्यू 383 बिलियन डॉलर था, तो 10% का मतलब 38 बिलियन डॉलर का दंड! ऐपल ने 545 पेज की याचिका दायर कर इसे ‘असंवैधानिक, मनमाना और अतिरिक्त’ बताया। कंपनी का तर्क: यह भारत के बाहर के बिजनेस को भी सजा देगा, जैसे किसी स्टेशनरी दुकान पर खिलौनों के कारोबार के जुर्माने के नाम पर पूरा टर्नओवर लेना। साथ ही, पुरानी घटनाओं पर रेट्रोस्पेक्टिव अप्लाई का विरोध।
यह भारत का पहला ऐसा केस है जहां कोई ग्लोबल कंपनी इस नियम को चुनौती दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐपल की राह मुश्किल है, क्योंकि कानून स्पष्ट है। लेकिन अगर कोर्ट ने ऐपल का पक्ष लिया, तो सीसीआई की पावर पर सवाल उठेंगे। यूरोप और अमेरिका में भी ऐपल पर इसी तरह के केस चल रहे हैं—यूएस में DOJ ने ऐप स्टोर को ‘मोनोपॉली’ कहा है। भारत में iPhone की बिक्री 2025 में 10 मिलियन से ऊपर पहुंचने का अनुमान है, लेकिन यह विवाद कंपनी की ग्रोथ को प्रभावित कर सकता है।
ऐपल ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा कि उनकी नीतियां यूजर्स की प्राइवेसी और सिक्योरिटी के लिए हैं। सीसीआई का फैसला आने में महीनों लग सकते हैं, लेकिन कोर्ट सुनवाई जल्द शुरू हो सकती है। क्या यह जुर्माना वाकई लगेगा या ऐपल बच निकलेगी? पूरी दुनिया की नजर भारत पर टिकी है।
