बीजेपी-शिंदे गुट में तनाव चरम पर: फडणवीस ने शिवसेना को लगाई लताड़, ‘गठबंधन धर्म निभाओ वरना…’
बीजेपी-शिंदे गुट में तनाव चरम पर: फडणवीस ने शिवसेना को लगाई लताड़, ‘गठबंधन धर्म निभाओ वरना…’
महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच तनाव की आग लग गई है। आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के रिश्ते खराब हो चुके हैं। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में शिवसेना के अधिकांश मंत्रियों के बहिष्कार के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिंदे गुट को सख्त नसीहत दी है—’गठबंधन धर्म का पालन करें, अन्यथा परिणाम भुगतने पड़ेंगे।’ यह बयान डोंबिवली क्षेत्र में बीजेपी के कथित ‘पोचिंग’ के आरोपों के बीच आया, जिससे विपक्ष ने महायुति की एकजुटता पर सवाल उठाए हैं।
कैबिनेट बैठक में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे अकेले पहुंचे, जबकि अन्य शिवसेना मंत्री जैसे उदय समंत और अतुल सावंत अनुपस्थित रहे। सूत्रों के अनुसार, शिवसेना नेताओं ने फडणवीस से मुलाकात में डोंबिवली में अपने स्थानीय नेताओं को बीजेपी के करीब लाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह पोचिंग न केवल गठबंधन के खिलाफ है, बल्कि आगामी कल्याण-डोंबिवली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (KDMC) चुनावों में शिवसेना की कमजोरी पैदा करेगी। फडणवीस ने जवाब में कहा, “गठबंधन धर्म सबको निभाना होगा। हमने उल्हासनगर में शिवसेना को समर्थन दिया था, अब बदले में विश्वासघात बर्दाश्त नहीं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि महायुति की 2024 विधानसभा जीत गठबंधन की एकता से हुई, और अब स्थानीय चुनावों में भी यही फॉर्मूला काम करेगा।
यह विवाद फरवरी 2025 से चला आ रहा है, जब शिंदे ने फडणवीस के सीएम बनने पर असंतोष जताया था। हाल ही में शिंदे के तीन सरकारी कार्यक्रमों से दूरी और सुरक्षा कटौती ने अफवाहें तेज कर दीं। बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने बहिष्कार को खारिज करते हुए कहा कि मंत्री चुनाव प्रचार में व्यस्त थे। लेकिन शिवसेना ने इसे ‘साजिश’ करार दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह तनाव बीएमसी और अन्य निकाय चुनावों में सीट बंटवारे पर असर डालेगा, जहां शिवसेना का पारंपरिक वर्चस्व है।
विपक्षी शिवसेना (UBT) के संजय राउत ने एक्स पर तंज कसा, “महायुति का ‘महा’ तो टूट चुका, अब ‘युति’ भी बिखरेगी।” वहीं, एनसीपी (अजित पवार गुट) ने तटस्थ रुख अपनाया है। फडणवीस ने कहा कि अमित शाह की मध्यस्थता में जल्द बैठक होगी, लेकिन शिंदे गुट के एक नेता ने चेतावनी दी, “हमें हल्के में न लें।” यह खींचतान महाराष्ट्र की सियासत को अस्थिर कर सकती है, खासकर जब केंद्र सरकार से फंडिंग पर निर्भरता बढ़ रही है। कुल मिलाकर, फडणवीस की नसीहत गठबंधन को बचाने की कोशिश है, लेकिन पोचिंग के आरोपों ने दरार को गहरा दिया है।
