राष्ट्रीय

छत्तीसगढ़ में 170 नक्सलियों का सरेंडर: नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक दिन, अमित शाह ने घोषित किया अबूझमाड़ नक्सल-मुक्त

छत्तीसगढ़ में 170 नक्सलियों का सरेंडर: नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक दिन, अमित शाह ने घोषित किया अबूझमाड़ नक्सल-मुक्त

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई है। गुरुवार को 170 नक्सलियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अबूझमाड़ और नॉर्थ बस्तर क्षेत्र को नक्सल-मुक्त घोषित कर दिया। शाह ने इसे ‘लैंडमार्क डे’ करार देते हुए कहा कि नक्सलवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है। दो दिनों में कुल 258 नक्सलियों के सरेंडर ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की सफलता को प्रमाणित किया है।

सरेंडर समारोह सुकमा जिले के एक बीएसएफ कैंप में आयोजित हुआ, जहां नक्सलियों ने सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के समक्ष हथियार जमा किए। इनमें महिलाएं और नाबालिग भी शामिल थे। शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए कहा, “यह आत्मसमर्पण विकास की लहर का नतीजा है। हमने नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया है।” उन्होंने बताया कि जनवरी 2024 में भाजपा सरकार बनने के बाद से 2,100 नक्सली सरेंडर कर चुके हैं, 1,785 गिरफ्तार हुए और 477 मारे गए। शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद उखाड़ फेंकने का संकल्प दोहराया।

पिछले दो दिनों की यह लहर सराहनीय है। बुधवार को सुकमा में 27 नक्सली (10 महिलाएं सहित) ने सरेंडर किया, जिनमें 16 पर कुल 50 लाख रुपये का इनाम था।

सरेंडर करने वालों ने माओवादी विचारधारा को ‘खोखला’ बताया और नक्सलियों द्वारा आदिवासियों पर अत्याचार, सुरक्षा बलों की बढ़ती ताकत तथा राज्य सरकार की ‘नियाद नेल्लानार’ योजना से प्रभावित होने का हवाला दिया। यह योजना दूरदराज गांवों में विकास कार्यों को गति देती है। नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने भी सरेंडर को प्रोत्साहित किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, “यह हमारी सरकार की कठोर नीति और विकास योजनाओं का परिणाम है। बस्तर क्षेत्र में अब शांति का दौर शुरू होगा।” सरेंडर करने वाले नक्सलियों को सरकारी योजना के तहत प्रशिक्षण, रोजगार और आर्थिक सहायता दी जाएगी। अबूझमाड़, जो कभी नक्सलियों का किला था, अब विकास का केंद्र बनेगा। शाह ने बाकी नक्सलियों से अपील की, “हथियार डालो, मुख्यधारा में लौट आओ। हिंसा का रास्ता बंद है।”

यह घटना नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव का संकेत दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरेंडर की यह संख्या नक्सल संगठन को कमजोर कर रही है। महाराष्ट्र के गढ़चिरोली में भी हाल ही में 61 नक्सलियों (मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ भूपति सहित) ने सरेंडर किया, जो छत्तीसगढ़ सीमा से सटा क्षेत्र है।केंद्र सरकार की रणनीति—सुरक्षा अभियान के साथ-साथ विकास—काम कर रही है।

कुल मिलाकर, यह ऐतिहासिक दिन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए मील का पत्थर है। क्या नक्सलवाद का अंत नजदीक है? सरकार का दावा है—हां। सरेंडर समारोह में स्थानीय आदिवासियों ने तालियां बजाकर स्वागत किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *