राष्ट्रीय

देश में खोले जाएंगे 57 नए केंद्रीय विद्यालय स्कूल, कैबिनेट ने दी मंजूरी

शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक बड़ा फैसला लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में देशभर में 57 नए केंद्रीय विद्यालय (केवी) खोलने को मंजूरी दे दी गई। इनमें से 19 विद्यालय बिहार में स्थापित होंगे, जो राज्य के शिक्षा परिदृश्य को नई दिशा देंगे। यह निर्णय नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप है, जिसमें पहली बार बालवाटिका (प्रि-प्राइमरी) की शुरुआत होगी। कुल 86,000 से अधिक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण और सस्ती शिक्षा का लाभ मिलेगा, साथ ही 4,600 नई नौकरियां सृजित होंगी।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि ये विद्यालय 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में खोले जाएंगे, जिनमें तेलंगाना, बिहार, हरियाणा, तमिलनाडु, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। कुल निवेश 5,862 करोड़ रुपये का होगा, जो 2026-27 से 2034-35 तक नौ वर्षों में खर्च होगा। इनमें से 7 केवी गृह मंत्रालय द्वारा प्रायोजित होंगे, जबकि शेष 50 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा। विशेष रूप से, 20 केवी उन जिलों में बनेंगे जहां वर्तमान में कोई केवी नहीं है, लेकिन केंद्रीय कर्मचारियों की संख्या अधिक है। इसके अलावा, 14 आकांक्षी जिलों, 4 वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों और 5 पूर्वोत्तर/पहाड़ी क्षेत्रों में होंगे।

बिहार में 19 नए केवी की स्थापना राज्य के शिक्षा स्तर को ऊंचा उठाने का बड़ा कदम माना जा रहा है। बिहार सरकार ने लंबे समय से इसकी मांग की थी, क्योंकि राज्य में केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों की संख्या बढ़ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “यह युवाओं के भविष्य को मजबूत करेगा।” शिक्षा विभाग के अनुसार, ये केवी रक्षा, अर्धसैनिक बलों और केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों की जरूरतें पूरी करेंगे। वर्तमान में देश में 1,288 केवी संचालित हैं, जिनमें 13.62 लाख छात्र पढ़ते हैं।

यह फैसला केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) की बढ़ती मांग को पूरा करेगा, जो 1963 में 20 स्कूलों से शुरू होकर अब विशाल नेटवर्क बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर सुधरेगा। कैबिनेट ने DA में 3% बढ़ोतरी का भी ऐलान किया, जो कर्मचारियों को अतिरिक्त राहत देगा। यह निर्णय अमृत काल में भारत को शिक्षा हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

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