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केदारनाथ मंदिर के पीछे ग्लेशियर में मिला नर कंकाल: तेलंगाना के लापता युवक की हुई पहचान

केदारनाथ मंदिर के पीछे ग्लेशियर में मिला नर कंकाल: तेलंगाना के लापता युवक की हुई पहचान

रुद्रप्रयाग, 27 अगस्त 2025: उत्तराखंड के पवित्र तीर्थस्थल केदारनाथ धाम के पीछे चौराबाड़ी ग्लेशियर क्षेत्र में एक नर कंकाल मिलने से सनसनी फैल गई है। कंकाल के पास मिले बैग में एक कॉलेज आईडी कार्ड से मृतक की पहचान तेलंगाना के जिला करीमनगर के राजेश्वरोपेट गांव निवासी नोमुला रोश्वन्थ (उम्र लगभग 20-22 वर्ष) के रूप में हुई है। यह युवक पिछले साल 31 अगस्त 2024 से लापता था, और उसके परिवार ने तुरंत गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि कंकाल को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग भेज दिया गया है।

घटना मंगलवार दोपहर की है, जब केदारनाथ धाम में व्यवसाय करने वाले कुछ स्थानीय युवक अपने फ्री समय में मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर ऊपर स्थित चौराबाड़ी झील (गांधी सरोवर) के आसपास घूमने गए थे। यह क्षेत्र समुद्र तल से करीब 12,800 फीट की ऊंचाई पर है, जहां बर्फीले पत्थरों और मलबे के बीच उन्होंने पत्थरों के नीचे एक मानव कंकाल देखा। डरते हुए उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस चौकी और प्रशासन को सूचना दी। सूचना मिलते ही केदारनाथ पुलिस, यात्रा मैनेजमेंट फोर्स (YMF) और सेक्टर मजिस्ट्रेट की टीम मौके पर पहुंची।

टीम ने कंकाल को सावधानीपूर्वक बरामद किया, जो काफी पुराना लग रहा था। कंकाल के पास एक बैग मिला, जिसमें एक मोबाइल फोन और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (पंजाब) का आईडी कार्ड था। आईडी पर नोमुला रोश्वन्थ का नाम, पता (केयर ऑफ नोमुला गणेश, इब्राहिमपटनम, मंडल राजेश्वर रावपेट, करीमनगर, तेलंगाना) और 2022 का वर्ष दर्ज था। पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रहलाद कोंडे ने बताया कि आईडी के आधार पर तेलंगाना पुलिस और मृतक के परिजनों से संपर्क किया गया। परिजनों ने पुष्टि की कि युवक घर से दिल्ली जाने की बात कहकर निकला था, लेकिन आखिरी कॉल 30 अगस्त 2024 को उत्तराखंड से की थी। उसके बाद से कोई सुराग नहीं मिला था।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने कहा कि कंकाल कम से कम एक साल पुराना लग रहा है, जो लापता होने की तारीख से मेल खाता है। यह क्षेत्र 2013 की भयावह केदारनाथ आपदा के लिए कुख्यात है, जहां बाढ़ और भूस्खलन से हजारों लोग मारे गए थे। आपदा के बाद भी यहां कभी-कभी यात्रियों के फंसने या लापता होने की घटनाएं होती रहती हैं, हालांकि प्रशासन ने इस दुर्गम इलाके में यात्रियों के जाने पर सख्त पाबंदी लगा रखी है। केदारनाथ यात्रा के निरीक्षक राजीव चौहान ने बताया कि बरामद कंकाल को केदारनाथ लाकर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं। अब डीएनए टेस्ट और पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा।

यह घटना केदारनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा उपायों पर फिर से सवाल खड़े कर रही है। हर साल लाखों श्रद्धालु चार धाम यात्रा के तहत यहां आते हैं, लेकिन ऊंचाई, खराब मौसम और दुर्गम इलाकों के कारण खतरे बने रहते हैं। प्रशासन ने यात्रियों को चेतावनी जारी की है कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में न जाएं। तेलंगाना से परिजन जल्द पहुंचने वाले हैं, और पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। यह दुखद घटना पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा रही है।

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