तुंगनाथ के दर पर फिर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, एक लाख पार हुआ श्रद्धालुओं का आंकड़ा
रुद्रप्रयाग, 24 अगस्त 2025: हिमालय की गोद में बसे दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर, तृतीय केदार तुंगनाथ धाम में तीर्थयात्रियों की भीड़ ने नया रिकॉर्ड कायम किया है। इस वर्ष तुंगनाथ धाम में अब तक 1 लाख 2 हजार 330 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं, जिसमें 11 विदेशी सैलानी भी शामिल हैं। मंदिर समिति के अनुसार, यह आंकड़ा शीतकाल के लिए कपाट बंद होने तक और बढ़ सकता है, जिससे नया कीर्तिमान स्थापित होने की संभावना है।
इस साल 2 मई को भगवान तुंगनाथ के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोले गए थे, और तब से प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु इस पवित्र स्थल पर पहुंच रहे हैं। तुंगनाथ धाम के प्रबंधक बलवीर नेगी ने बताया कि अभी तक 50,185 पुरुष, 42,183 महिलाएं, 9,677 बच्चे, 274 साधु-सन्यासी और 11 विदेशी सैलानियों ने मंदिर में पूजा-अर्चना और जलाभिषेक कर विश्व समृद्धि की कामना की है।
हालांकि, बीती 31 जुलाई को केदारनाथ यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर आई दैवीय आपदा और उत्तरकाशी के धराली में हुए हआदा ने तुंगनाथ धाम की यात्रा को प्रभावित किया था। इस दौरान श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट देखी गई। लेकिन अब तुंगनाथ घाटी में मौसम खुशनुमा होने और पितृ पक्ष के शुरू होने से यात्रा फिर से रफ्तार पकड़ रही है।
मंदिर समिति के चंद्रमोहन बजवाल ने बताया कि चोपता से सीधे चंद्रशिला शिखर जाने वाले पर्यटकों को मंदिर समिति के रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि ज्यादातर सैलानी प्रकृति का आनंद लेने के लिए वहां पहुंचते हैं। फिर भी, तुंगनाथ धाम और चंद्रशिला की प्राकृतिक सुंदरता श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है।
इस वर्ष तीर्थयात्रियों की भारी संख्या ने न केवल तुंगनाथ घाटी के पर्यटन और तीर्थाटन व्यवसाय को बढ़ावा दिया है, बल्कि मंदिर समिति की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं, और तुंगनाथ घाटी में रौनक लौट आई है। मंदिर समिति का अनुमान है कि सितंबर के अंत तक यात्रा और तेज होगी, और कपाट बंद होने तक यह आंकड़ा 2 लाख के करीब पहुंच सकता है।
तुंगनाथ धाम, जो चंद्रशिला की तलहटी में 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, अपनी आध्यात्मिक और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यह यात्रा न केवल श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव है, बल्कि पर्यटकों के लिए हिमालय की खूबसूरती का अनुपम नजारा भी पेश करती है।
