यूएन में भारत का पाकिस्तान और धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट पर करारा हमला
यूएन में भारत का पाकिस्तान और धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट पर करारा हमला
संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत ने धार्मिक या आस्था की स्वतंत्रता पर विशेष दूत नजीला घनेया की हालिया रिपोर्ट की कड़ी आलोचना की है। भारत ने रिपोर्ट को एकतरफा और पक्षपातपूर्ण बताते हुए कहा कि इसमें आतंकवाद की गंभीरता को नजरअंदाज किया गया है और कोविड-19 के दौर की घटनाओं में केवल विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) को निशाना बनाया गया है।
आतंकवादियों की वकालत और रिपोर्ट के पक्षपात पर सवाल
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारतीय मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोगों के दर्द से राजनीतिक फायदा उठाकर रिपोर्ट तैयार नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने हैरानी जताई कि रिपोर्ट में आतंकवादियों के अधिकारों की बात तो की जाती है, लेकिन उनके पीड़ितों के प्रति वैसी चिंता नहीं दिखती।
विशेष दूत की रिपोर्ट में कश्मीर में सुरक्षा अभियानों के बाद शवों को सौंपने और सीएए (CAA) विरोध प्रदर्शनों के दौरान अंतिम संस्कार पर पाबंदियों का जिक्र किया गया था। इस पर भारत ने सवाल उठाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान न्यूयॉर्क जैसे विकसित शहरों में मृतकों को अलग द्वीप पर सामूहिक कब्रों में दफनाया गया था, लेकिन रिपोर्ट में विकसित देशों की ऐसी घटनाओं का कोई जिक्र नहीं किया गया।
पाकिस्तान को दिया करारा जवाब
बैठक के दौरान पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए मंगलानंदन ने इसे बेहद विडंबनापूर्ण बताया। उन्होंने याद दिलाया कि 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तान ने अपने ही शहीद सैनिकों के शवों को लेने से इनकार कर दिया था, जिन्हें भारतीय सेना ने पूरे सैन्य सम्मान और इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ दफनाया था। भारत ने स्पष्ट किया कि जो देश अपने ही अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने में नाकाम है, उसे भारत को उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।

