आजम खान से मिलने रामपुर पहुंचे अखिलेश यादव तो AIMIM ने घेरा, बोली- चुनाव आते ही याद आया मुसलमान!
आजम खान से मिलने रामपुर पहुंचे अखिलेश यादव तो AIMIM ने घेरा, बोली- चुनाव आते ही याद आया मुसलमान!
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के रामपुर पहुंचने पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने उन पर निशाना साधा है। पार्टी के प्रवक्ता शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को चुनाव नजदीक आते ही आजम खान की याद आई है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सैफई परिवार का कोई यादव जेल में होता, तो क्या अखिलेश यादव इसी तरह चुप रहते या उसके समर्थन में आंदोलन करते?
AIMIM ने दावा किया कि अखिलेश यादव पर ओवैसी के राजनीतिक दबाव का असर दिख रहा है। पार्टी का कहना है कि उत्तर प्रदेश का मुस्लिम मतदाता अब सपा की राजनीति को समझने लगा है और 2027 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों को लेकर सपा की रणनीति को चुनौती मिलेगी।
‘सैफई परिवार का कोई यादव जेल में होता तो आंदोलन करते अखिलेश’
AIMIM प्रवक्ता शादाब चौहान ने अखिलेश यादव के रामपुर दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आते ही उन्हें आजम खान की याद आई है। उन्होंने पूछा कि अखिलेश यादव अब तक कितनी बार जेल में आजम खान से मिलने पहुंचे थे?
शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि यदि सैफई परिवार का कोई यादव जेल में होता, तो अखिलेश यादव उसके समर्थन में आंदोलन करते। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज अब राजनीतिक दलों की रणनीति को समझ रहा है और सपा की कथित सियासी चालों से प्रभावित नहीं होगा।
AIMIM का दावा- 2027 में मुस्लिम वोटों पर नहीं चलेगी सपा की रणनीति
AIMIM ने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के लिए मुस्लिम वोटों को एकजुट रखना आसान नहीं होगा। पार्टी के मुताबिक, असदुद्दीन ओवैसी लगातार सपा और अखिलेश यादव की राजनीति पर सवाल उठाते रहेंगे।
AIMIM का आरोप है कि अखिलेश यादव को अब आजम खान और रामपुर की याद इसलिए आई है, क्योंकि उन्हें ओवैसी की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता से चुनौती मिल रही है। हालांकि, ये आरोप AIMIM की ओर से लगाए गए हैं।
ओवैसी ने उठाया मुस्लिम नेतृत्व और हिस्सेदारी का सवाल
असदुद्दीन ओवैसी लगातार समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते रहे हैं। वह राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी का सवाल उठाते हुए पूछते रहे हैं कि यदि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी करीब 20 प्रतिशत है और यादव समुदाय की आबादी इससे कम है, तो मुख्यमंत्री पद और राजनीतिक नेतृत्व में मुसलमानों को अधिक प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिलना चाहिए?
ओवैसी का तर्क है कि यदि सपा मुस्लिम समुदाय के हितों को लेकर गंभीर है, तो उसे मुस्लिम नेतृत्व को भी आगे बढ़ाना चाहिए। इस मुद्दे पर AIMIM और सपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।
यूपी चुनाव से पहले सपा के लिए चुनौती बन सकती है AIMIM
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम मतदाताओं को लेकर राजनीतिक दलों के बीच खींचतान बढ़ती दिख रही है। AIMIM की सक्रियता और ओवैसी के सवालों से सपा के सामने मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो सकती है।
रामपुर, मुरादाबाद, संभल, आजमगढ़ और मऊ जैसे जिलों में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। ऐसे में इन इलाकों में AIMIM की राजनीतिक सक्रियता का कितना असर पड़ेगा, यह आगामी चुनाव में देखने वाली बात होगी। फिलहाल, अखिलेश यादव के रामपुर दौरे के बाद सपा और AIMIM के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।

