फ्रांस में प्रदर्शनकारियों पर सख्ती की तैयारी, मैक्रों बोले- ट्रेड यूनियनों के अलावा अन्य प्रदर्शनों पर लग सकता है प्रतिबंध
फ्रांस में प्रदर्शनकारियों पर सख्ती की तैयारी, मैक्रों बोले- ट्रेड यूनियनों के अलावा अन्य प्रदर्शनों पर लग सकता है प्रतिबंध
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश में हिंसक प्रदर्शनों और सड़कों पर होने वाली अप्रिय घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं। गल्फ देशों के दौरे से लौटने के बाद मैक्रों ने मंत्रियों और सुरक्षा परिषद के साथ बैठक की। इसमें फ्रांसीसी शहरों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, हिंसा पर नियंत्रण और विरोध प्रदर्शनों से निपटने की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में कथित कट्टर वामपंथी समूहों की गतिविधियों की निंदा भी की गई।
अल्ट्रा-लेफ्ट समूहों पर मैक्रों का निशाना
मैक्रों ने आरोप लगाया कि संगठित अल्ट्रा-लेफ्ट यानी कट्टर वामपंथी समूह राजनीतिक व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इन समूहों की गतिविधियां गणराज्य की संस्थाओं के लिए चुनौती हैं और इनमें शामिल कुछ लोग हिंसक घटनाओं की जिम्मेदारी भी लेते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार दंगों और हिंसा को रोकने के लिए पूरी दृढ़ता से कार्रवाई करेगी। उन्होंने कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ट्रेड यूनियनों के अलावा अन्य प्रदर्शनों पर लग सकती है रोक
मैक्रों ने संकेत दिया कि सरकार विरोध प्रदर्शनों को लेकर नियम और सख्त कर सकती है। उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियनों की ओर से आयोजित वैध प्रदर्शनों की कानून के तहत समीक्षा की जाएगी और उन्हें सुरक्षित तरीके से आयोजित करने की अनुमति दी जा सकती है।
हालांकि, उन्होंने गैर-ट्रेड यूनियन संगठनों की ओर से आयोजित अन्य विरोध प्रदर्शनों पर, जहां तक संभव हो, पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की संभावना भी जताई। इस बयान के बाद फ्रांस में प्रदर्शन करने के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।
पिछले प्रदर्शनों से सरकार ने लिया सबक
पिछले सप्ताहांत हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए मैक्रों ने माना कि स्थिति से निपटने में कुछ कमियां रह गई थीं। उन्होंने कहा कि घटनाक्रम कुछ हद तक अचानक सामने आया, जिससे प्रशासन की तैयारियों में मुश्किलें आईं।
राष्ट्रपति ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पिछले अनुभवों से सबक लेकर आगामी सप्ताहांत के लिए बेहतर तैयारी की जाए। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन को जरूरत पड़ने पर लोगों के जमावड़े पर रोक लगाने जैसे कदम उठाने का अधिकार दिया गया है। साथ ही, हिंसा से जुड़े मामलों में कार्रवाई के लिए न्यायिक व्यवस्था को भी तैयार रखा गया है।
दंगाइयों के खिलाफ कड़ी सजा के पक्ष में मैक्रों
मैक्रों ने न्याय मंत्रालय की उस मांग का समर्थन किया, जिसमें दंगों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी सजा देने की बात कही गई है। सरकार का कहना है कि हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जरूरी है, ताकि सार्वजनिक संपत्ति और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
छात्रों की मांगों पर भी होगी चर्चा
सख्त कार्रवाई के संकेतों के बीच मैक्रों ने छात्रों की शिकायतों और मांगों पर बातचीत का रास्ता भी खुला रखा है। उन्होंने बताया कि अगले सप्ताह प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में उनकी जायज मांगों और समस्याओं पर चर्चा की जाएगी।
फ्रांस में सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक ओर हिंसा और सार्वजनिक अव्यवस्था पर नियंत्रण रखना, तो दूसरी ओर नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा करना। आने वाले दिनों में सरकार के फैसलों से यह स्पष्ट होगा कि प्रदर्शन संबंधी नियमों में कितनी सख्ती की जाती है।

