Wednesday, October 21, 2026
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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू: 950 किमी की पदयात्रा, राजनीतिक बयानबाजी तेज

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू: 950 किमी की पदयात्रा, राजनीतिक बयानबाजी तेज

​भोपाल / उज्जैन:

​मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने उज्जैन से अयोध्या तक की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ का शंखनाद कर दिया है। करीब 950 किलोमीटर लंबी यह पैदल यात्रा लगभग 70 दिनों में पूरी होकर भगवान राम की नगरी अयोध्या पहुंचेगी। इस यात्रा के माध्यम से दिग्विजय सिंह प्रमुख मंदिरों के चढ़ावे और धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की मांग को प्रमुखता से उठा रहे हैं। हालांकि मध्य प्रदेश कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर इस यात्रा से दूरी बना रखी है, लेकिन पार्टी के कई दिग्गज नेताओं और संतों का समर्थन इसके साथ है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे लेकर तीखा हमला बोला है।

​पूजा-पाठ के साथ यात्रा का शंखनाद

​इस लंबी और कठिन पदयात्रा पर निकलने से पहले दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ विधि-विधान से पार्थिव शिवलिंग का पूजन किया। इसके पश्चात उन्होंने प्रसिद्ध चिंतामन गणेश मंदिर और महाकाल मंदिर में दर्शन कर अपनी यात्रा की आधिकारिक शुरुआत की।

​यात्रा का स्वरूप: यह सफर पूरी तरह पैदल तय किया जाएगा, जिसमें लगभग 70 दिनों का समय लगने का अनुमान है।

​मुख्य उद्देश्य: मंदिरों के प्रबंधन, चढ़ावे के पैसों के उपयोग और धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं में पूरी पारदर्शिता लाना इस यात्रा का मुख्य एजेंडा है।

​अनुमानित खर्च और पड़ाव

​यात्रा के वित्तीय पहलुओं पर भी काफी चर्चा हो रही है:

​छोटे ग्रामीण पड़ावों पर प्रतिदिन लगभग 20 से 30 हजार रुपए तथा बड़े पड़ावों पर 50 से 60 हजार रुपए तक खर्च होने का अनुमान है।

​इस प्रकार, प्रतिदिन औसतन 30 से 50 हजार रुपए के हिसाब से 70 दिनों की पूरी यात्रा पर कुल 30 से 40 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।

​संतों का समर्थन और कांग्रेस की ‘औपचारिक’ दूरी

​इस यात्रा की राजनीतिक और धार्मिक तस्वीर काफी दिलचस्प नजर आ रही है:

​कांग्रेस का रुख: मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भले ही इस यात्रा से आधिकारिक रूप से दूरी बना रखी है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा जैसे कई बड़े नेता इसके समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। जीतू पटवारी ने दावा किया कि इस यात्रा के जरिए ‘चंदा चोरी’ और ‘वोट चोरी’ जैसी कथित गड़बड़ियों का पर्दाफाश किया जाएगा।

​संत समाज का साथ: महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा सहित कई प्रमुख संतों ने इस यात्रा का समर्थन किया है। इसके अलावा ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती, और अग्निपीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि श्रीमद् रामकृष्णानंद जी महाराज का भी आशीर्वाद व समर्थन इस यात्रा को प्राप्त हुआ है।

​परिवार की प्रतिक्रिया

​अमृता सिंह (पत्नी): दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता सिंह ने इस यात्रा को धर्म और अधर्म की लड़ाई बताते हुए इसकी तुलना भगवान राम के ‘रावण वध’ के संकल्प से की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान राम ने शिव के आशीर्वाद से लंका पर चढ़ाई की थी, उसी तरह यह यात्रा अधर्म पर धर्म की विजय का संकल्प है।

​जयवर्धन सिंह (पुत्र): बेटे जयवर्धन सिंह ने अपने पिता की 79 वर्ष की आयु का जिक्र करते हुए कहा कि इस उम्र में लगभग एक हजार किलोमीटर पैदल चलना बेहद कठिन है, लेकिन यह सनातन धर्म और आत्मा के शुद्धिकरण से जुड़ा मार्ग है।

​BJP का तीखा पलटवार

​भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस यात्रा को लेकर दिग्विजय सिंह और कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा है:

​मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि भगवान के नाम पर कोई यात्रा की जाती है, तो उसके पीछे का भाव और नीयत सही होनी चाहिए।

​कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने इसे ‘सनातन को तोड़ने वाली यात्रा’ करार दिया और दिग्विजय सिंह के पुराने बयानों को लेकर सवाल खड़े किए।

​वहीं, साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया (हर्षानंद गिरि) ने भी तंज कसते हुए सवाल उठाया कि राम मंदिर के निर्माण के समय वैसा उत्साह नहीं दिखा, जैसा अब मंदिर के चंदे पर सवाल उठाने में दिखाया जा रहा है।

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