Wednesday, October 21, 2026
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उत्तराखंड के 35 हजार पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत: गोल्डन कार्ड योजना से दोबारा जुड़ने का मिलेगा मौका, मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी सुपर स्पेशलिटी सेवाएं

उत्तराखंड के 35 हजार पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत: गोल्डन कार्ड योजना से दोबारा जुड़ने का मिलेगा मौका, मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी सुपर स्पेशलिटी सेवाएं

​देहरादून:

​उत्तराखंड के करीब 35 हजार पेंशनर्स के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने गोल्डन कार्ड योजना (राज्य स्वास्थ्य योजना) से बाहर हो चुके इन पेंशनर्स को एक बार फिर इस योजना से जुड़ने का अवसर देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाते हुए सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं शुरू करने की बड़ी योजना पर भी काम तेजी से चल रहा है।

​क्यों उठाया गया यह कदम? (पेंशनर्स की मांग और मुश्किलें)

​योजना छोड़ने की वजह: पूर्व में गोल्डन कार्ड योजना के तहत समुचित इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ न मिलने के कारण उत्तराखंड के लगभग 35 हजार पेंशनर्स ने इस योजना से बाहर आने का विकल्प चुना था।

​चिकित्सा प्रतिपूर्ति की समस्या: योजना से बाहर होने के बाद राज्य सरकार ने उनके लिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) की व्यवस्था लागू की थी, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान पेंशनर्स को इलाज के समय काफी कठिनाइयों और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

​अधिकारियों और मंत्रियों से गुहार: इस समस्या से जूझ रहे कई पेंशनर्स ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल और राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (SHA) के अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा की थी और दोबारा गोल्डन कार्ड योजना से जोड़ने का अनुरोध किया था।

​कैसे मिलेगी दोबारा योजना में एंट्री? (प्रक्रिया और शर्तें)

​पेंशनर्स की इन मांगों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को आवश्यक निर्देश दे दिए हैं:

​करना होगा आवेदन: योजना में दोबारा शामिल होने के लिए पेंशनर्स को औपचारिक रूप से आवेदन करना होगा।

​प्रीमियम की प्रक्रिया: आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित पेंशनर्स के मूल विभाग द्वारा प्राधिकरण को प्रीमियम की राशि भेजी जाएगी, जिसके बाद वे दोबारा इस योजना के दायरे में आ जाएंगे।

​कड़ी शर्त: स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि एक बार पुनः योजना में शामिल होने के बाद पेंशनर्स को भविष्य में इससे बाहर निकलने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा।

​स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

​”राज्य स्वास्थ्य योजना से बाहर हो गए पेंशनर्स यदि चाहते हैं, तो उन्हें दोबारा योजना में शामिल होने का अवसर दिया जा सकता है। इस संदर्भ में अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सरकार का मुख्य प्रयास यह है कि राज्य के सभी सेवारत कर्मचारी और पेंशनर्स ‘गोल्डन कार्ड योजना’ का सुगमता से लाभ उठा सकें।”

​राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में शुरू होंगी सुपर स्पेशलिटी सेवाएं

​पेंशनर्स के स्वास्थ्य हितों के साथ-साथ सरकार ने आम जनता को बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं मुहैया कराने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत उत्तराखंड के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिटी सेवाएं शुरू की जा रही हैं:

​वर्तमान स्थिति: राजधानी के दून मेडिकल कॉलेज में कुछ सुपर स्पेशलिटी सेवाओं की शुरुआत पहले ही की जा चुकी है।

​विस्तार की योजना: अब इस सुविधा का दायरा बढ़ाते हुए हल्द्वानी, श्रीनगर, हरिद्वार और अल्मोड़ा के मेडिकल कॉलेजों में भी सुपर स्पेशलिटी सेवाएं शुरू की जाएंगी।

​विशेषज्ञ इलाज: इन सभी मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को कार्डियोलॉजी (दिल से जुड़ी बीमारियां), नेफ्रोलॉजी (किडनी संबंधी समस्याएं) और न्यूरोलॉजी (मस्तिष्क व तंत्रिका तंत्र) से जुड़े रोगों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही मिल सके, इसके लिए जरूरी अत्याधुनिक उपकरण और डॉक्टर जुटाए जा रहे हैं।

​पीजी सीटों में बढ़ोतरी: सरकार का मुख्य फोकस इन मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिटी विंग से संबंधित पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) सीटों की संख्या बढ़ाने पर भी है, जिससे भविष्य में राज्य को और अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक मिल सकें।

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