Wednesday, October 21, 2026
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अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ पर मुंबई में ‘फ्रीडम 250’ कार्यक्रम: विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का भारत-अमेरिका संबंधों पर बड़ा बयान

अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ पर मुंबई में ‘फ्रीडम 250’ कार्यक्रम: विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का भारत-अमेरिका संबंधों पर बड़ा बयान

​मुंबई:

​अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मंगलवार को मुंबई में विशेष स्वागत समारोह ‘फ्रीडम 250’ आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका की बढ़ती वैश्विक व रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) और साझा हितों के विस्तार पर जोर दिया।

​1. विदेश मंत्री एस. जयशंकर का संबोधन: “बदलती दुनिया में साझा हितों का विस्तार जरूरी”

​विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, उनकी पत्नी जेनेट रुबियो, अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका की साझेदारी पिछले कुछ दशकों में काफी मजबूत हुई है:

​गेटवे ऑफ इंडिया और ऐतिहासिक संबंध: जयशंकर ने मुंबई की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वित्तीय राजधानी होने के साथ-साथ मुंबई तकनीक, उद्यमिता, कला, संस्कृति और संगीत का केंद्र है। उन्होंने अतीत के बर्फ व्यापार, स्वामी विवेकानंद की शिकागो यात्रा से लेकर मुंबई में जैज संगीत, जनरल इलेक्ट्रिक के रिएक्टर और स्टारबक्स के पहले आउटलेट का उदाहरण देकर दोनों देशों के पुराने रिश्तों को रेखांकित किया।

​तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण और 26/11 स्मारक: विदेश मंत्री ने 26/11 हमले के पीड़ितों और ताज होटल स्थित स्मारक पर मार्को रुबियो द्वारा दी गई श्रद्धांजलि की सराहना की। उन्होंने तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण के अमेरिकी फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी आत्मरक्षा के अधिकार पर अडिग है और उम्मीद करता है कि उसके साझेदार भी आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाएंगे।

​भविष्य की संभावनाएं: जयशंकर ने व्यापार, निवेश, रक्षा, नागरिक उड्डयन, ऊर्जा, नई तकनीकों तथा हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में दोनों देशों के साझा हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

​2. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का संबोधन: “21वीं सदी का इतिहास इसी क्षेत्र में लिखा जा रहा है”

​अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों को 21वीं सदी की दिशा तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ करार दिया:

​21वीं सदी की कहानी: रुबियो ने कहा, “अगर आप 21वीं सदी के इतिहास के बारे में सोचें, तो उसकी कहानी इसी क्षेत्र में और अभी इसी वक्त लिखी जा रही है। 21वीं सदी कैसी होगी—अच्छी या बुरी—यह इस बात से तय होगा कि इस क्षेत्र में क्या होता है, और इसमें भारत व अमेरिका के संबंध मुख्य भूमिका निभाएंगे।”

​सुरक्षित हिंद-प्रशांत और मुक्त व्यापार: रुबियो ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर किसी भी देश का आधिपत्य या प्रभुत्व नहीं होना चाहिए। इस मुद्दे पर भारत और अमेरिका की सोच 100 फीसदी एक जैसी है।

​सुपरइंटेलिजेंस और क्वांटम तकनीक: उन्होंने कहा कि दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि क्वांटम कंप्यूटिंग और सुपरइंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों का इस्तेमाल पूरी मानवता की भलाई के लिए होना चाहिए।

​असाधारण तालमेल: कुछ मतभेदों के बावजूद, रुबियो ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुख्य मुद्दों पर असाधारण तालमेल है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह आगे भी हर तीन महीने में भारत आते रहेंगे।

​समारोह के समापन पर विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिका को उसकी 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ की बधाई दी और भारत की ओर से रणनीतिक साझेदारी को नए शिखरों पर ले जाने का संकल्प दोहराया।

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