पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान को गुजरात सरकार से बड़ी राहत: वडोदरा के विवादित प्लॉट के आवंटन को मिली मंजूरी
पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान को गुजरात सरकार से बड़ी राहत: वडोदरा के विवादित प्लॉट के आवंटन को मिली मंजूरी
वडोदरा / गांधीनगर:
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और सांसद यूसुफ पठान को गुजरात सरकार से एक बड़े मामले में राहत मिली है। वडोदरा के तांदलजा क्षेत्र में स्थित जिस 978 वर्ग मीटर के प्लॉट को लेकर पिछले कई वर्षों से कानूनी और प्रशासनिक विवाद चल रहा था, उसे राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर यूसुफ पठान को आवंटित करने की मंजूरी दे दी है।
प्लॉट आवंटन की मुख्य बातें (Allocation Details):
प्लॉट का क्षेत्रफल: 978 वर्ग मीटर (बाजार मूल्य लगभग 20.53 करोड़ रुपये)।
निःशुल्क उपहार: कुल जमीन में से 500 वर्ग मीटर जमीन आवासीय उद्देश्य के लिए यूसुफ पठान को निःशुल्क (Gift) दी जाएगी।
शेष जमीन पर छूट: बाकी बची 478 वर्ग मीटर जमीन निर्धारित सरकारी मूल्य पर 45% की भारी छूट के साथ हस्तांतरित की जाएगी।
मुआवजा व्यवस्था: राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि राजस्व विभाग इस जमीन के मूल्य के बराबर दूसरी भूमि वडोदरा महानगरपालिका (VMC) को मुआवजे के तौर पर देगा। इस पूरे आवंटन पर अंतिम मुहर वीएमसी की स्थायी समिति और सामान्य सभा की मंजूरी के बाद लगेगी।
विशेष मामला: सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह फैसला केवल एक ‘विशेष मामले’ के रूप में लिया गया है और इसे भविष्य के लिए कोई मिसाल नहीं माना जाएगा। (बता दें कि इस विवादित प्लॉट के ठीक पास ही पठान परिवार का पुराना आवास स्थित है।)
क्या था पूरा विवाद? (क्रिकेटर की मांग से लेकर हाईकोर्ट के सफर तक)
साल 2012 की शुरुआत: यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम (VMC) से पूर्व भारतीय क्रिकेटर होने और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बिना नीलामी के 99 साल की लीज पर यह प्लॉट देने का अनुरोध किया था। वीएमसी ने प्रस्ताव मान लिया था और उस समय जमीन की कीमत करीब 5.6 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जिसे चुकाने के लिए पठान तैयार भी थे।
2014 में अस्वीकृति: बिना नीलामी के सरकारी जमीन देने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी थी, लेकिन साल 2014 में गुजरात के शहरी विकास विभाग ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
अतिक्रमण का विवाद: नगर निगम का आरोप था कि प्रस्ताव रद्द होने के बावजूद यूसुफ पठान ने जमीन के चारों ओर घेराबंदी (Fencing) कर ली थी।
कानूनी लड़ाई (2024–2026): साल 2024 में वीएमसी ने कथित अतिक्रमण को हटाने के लिए उन्हें नोटिस भेजा, जिसके खिलाफ यूसुफ पठान ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया था। अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने सरकार के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें जमीन का आवंटन खारिज किया गया था।
याचिका वापस लेना: जून 2026 में सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल उठाया था कि बिना आवंटन और भुगतान के किसी व्यक्ति का उस पर अधिकार कैसे हो सकता है। इसके बाद, 31 अगस्त 2026 को यूसुफ पठान ने हाईकोर्ट से अपनी याचिका बिना शर्त वापस ले ली थी।
कानूनी दांव-पेंच और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब राज्य सरकार के इस नए फैसले से यूसुफ पठान को इस मामले में बड़ी राहत मिल गई है।

