राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष: नागपुर में विजयादशमी पर शस्त्र पूजन, संघ प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन के प्रमुख बिंदु
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष: नागपुर में विजयादशमी पर शस्त्र पूजन, संघ प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन के प्रमुख बिंदु
नागपुर:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर में विजयादशमी के पावन पर्व पर पारंपरिक शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देश और दुनिया से जुड़े तमाम वैचारिक, राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। अपने संबोधन में उन्होंने वैश्विक उथल-पुथल, सुनियोजित आंदोलनों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों, युवा पीढ़ी की भूमिका और सामाजिक सद्भाव पर विशेष जोर दिया।
संघ प्रमुख के भाषण के प्रमुख और महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. आंदोलन समाधान के लिए होने चाहिए, समस्या या अराजकता के लिए नहीं
देश में लगातार हो रहे आंदोलनों और प्रदर्शनों पर चिंता जताते हुए संघ प्रमुख ने स्पष्ट संदेश दिया कि प्रजातंत्र में आंदोलन का अधिकार है, लेकिन उनका उद्देश्य हमेशा समाधान खोजना होना चाहिए, न कि समाज में अनबन, द्वेष या विभाजन पैदा करना।
सस्ती लोकप्रियता से परहेज: उन्होंने कहा कि सस्ती लोकप्रियता या राजनीतिक फायदे का लालच हमारी समझ और सद्भावना पर हावी नहीं होना चाहिए।
बाहरी ताकतों का हस्तक्षेप: यदि आंदोलन किसी स्वार्थी या अलग लक्ष्य से चलाए जाते हैं, तो वे राजनीति का साधन बन जाते हैं। ऐसी स्थितियों का लाभ वे ताकतें उठाती हैं जो भारत को दबाना चाहती हैं, और देश में असंतोष तथा अराजकता भड़काकर समाज को बांटने का प्रयास करती हैं।
2. फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश के बहाने वैश्विक षड्यंत्र पर चिंता
मोहन भागवत ने पश्चिमी देशों से चली आंधी और ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) की साजिशों पर बड़ा बयान दिया।
उन्होंने कहा कि फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में जो कुछ हुआ, वह सब एक सोचे-समझे षड्यंत्र का हिस्सा है। रिजीम चेंज के नाम पर दुनिया भर में ऐसी कार्रवाइयां चल रही हैं, जिनसे प्रगतिशील देश भी त्रस्त हैं।
उन्होंने आगाह किया कि भारत का एक महाशक्ति के रूप में उभरना इन ताकतों को रास नहीं आता, इसलिए हमें पूरी तरह सतर्क और सावधान रहने की आवश्यकता है।
3. AI तकनीक और आधुनिक विकास पर संतुलन का संदेश
विज्ञान, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि तकनीक मानव जीवन को बेहतर बनाने का साधन है, स्वयं जीवन का उद्देश्य नहीं।
विवेक और नैतिकता जरूरी: परमाणु ऊर्जा का उपयोग जहाँ स्वच्छ ऊर्जा के लिए हो सकता है, वहीं विनाशकारी हथियार बनाने में भी हो सकता है। इसी तरह AI जैसी उपयोगी तकनीक का इस्तेमाल लोगों को भ्रमित करने, ठगने और झूठ फैलाने के लिए भी किया जा सकता है। इसलिए तकनीक का प्रयोग विवेक और नैतिकता के साथ होना चाहिए।
पर्यावरण और OTT पर बात: उन्होंने नेपाल की आपदा का जिक्र करते हुए एकतरफा विकास पर चिंता जताई। इसके साथ ही, नई पीढ़ी को दुष्परिणामों से बचाने के लिए OTT प्लेटफार्मों और इंटरनेट पर उचित अनुशासन व प्रतिबंध लागू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
4. नई पीढ़ी (Gen-Z) और ड्रग्स की समस्या पर मार्गदर्शन
युवाओं को सलाह देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आज के अभिभावकों को अपनी नई पीढ़ी को उचित और अनुचित में भेद करने की कला सिखानी होगी।
नशे के खिलाफ अभियान: उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशीلي दवाओं (ड्रग्स) की लत को एक गंभीर समस्या बताया और घोषणा की कि आरएसएस देश में नशे के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाएगा।
संस्कार और आचरण: उन्होंने याद दिलाया कि सही आचरण त्यागने के कारण ही अतीत में हमारा पतन हुआ था और हम गुलाम बने थे, इसलिए युवाओं को अपने राष्ट्रबोध और कर्तव्यनिष्ठा को समझना होगा।
5. “भारत में हिंदू-मुसलमान एक हैं, पूर्वज समान हैं”
सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि समाज में अच्छा माहौल बनाए रखने के लिए सभी को धैर्य और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए।
साझा विरासत: उन्होंने जोर देकर कहा कि हम सभी के पूर्वज एक हैं और हमारी संस्कृति का मूल भी एक है। किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलना ही भारतीय परंपरा है।
हिंदू स्वभाव: उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छर द्वारा फ्लाइट में लोगों की जान बचाने का उदाहरण देते हुए कहा कि दूसरों की रक्षा करना और दुनिया को जोड़ने की शक्ति रखना ही ‘हिंदू स्वभाव’ है।

