Saturday, October 17, 2026
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अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियों में चीन की हिस्सेदारी में भारी गिरावट, भारत की होल्डिंग्स में लगातार तीसरे महीने बड़ा इजाफा

अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियों में चीन की हिस्सेदारी में भारी गिरावट, भारत की होल्डिंग्स में लगातार तीसरे महीने बड़ा इजाफा

​वाशिंगटन / नई दिल्ली:

​अमेरिकी सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी (US Treasury) प्रतिभूतियों में चीन की हिस्सेदारी में तेजी से कमी आई है, जबकि भारत की होल्डिंग्स में लगातार तीसरे महीने शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ट्रेजरी इंटरनेशनल कैपिटल (TIC) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था के ये बड़े आंकड़े सामने आए हैं।

​चीन की होल्डिंग्स में आई भारी गिरावट

​अगस्त के आंकड़े: अगस्त के अंत तक चीन की कुल ट्रेजरी होल्डिंग्स घटकर 590.7 अरब डॉलर रह गई हैं, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 618 अरब डॉलर था।

​सालाना तुलना: एक साल पहले यानी अगस्त 2025 में चीन के पास 699.7 अरब डॉलर की होल्डिंग्स थीं। इस प्रकार पिछले 12 महीनों में चीन की होल्डिंग्स में लगभग 109 अरब डॉलर की भारी कमी दर्ज की गई है।

​भारत की होल्डिंग्स में लगातार तीसरे महीने बढ़त

​इसके विपरीत, भारत की अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स में मजबूत सुधार देखने को मिला है:

​अगस्त के आंकड़े: अगस्त में भारत की होल्डिंग्स जुलाई के 202.6 अरब डॉलर से बढ़कर 219.7 अरब डॉलर पर पहुंच गईं। एक ही महीने में लगभग 17 अरब डॉलर की यह बढ़ोतरी बेहद खास मानी जा रही है।

​सुधार का रुख: इस साल अप्रैल में भारत की होल्डिंग्स गिरकर 181 अरब डॉलर के निचले स्तर पर आ गई थीं, जिसके बाद मई (181.3 अरब डॉलर), जून (186.4 अरब डॉलर), जुलाई (202.6 अरब डॉलर) और अब अगस्त में लगातार सुधार हुआ है। इसके साथ ही भारत की होल्डिंग्स लगभग उस स्तर पर वापस आ गई हैं, जहां वे एक साल पहले थीं।

​अंतर में कमी: इन बदलावों के चलते चीन और भारत की होल्डिंग्स के बीच का अंतर, जो एक साल पहले लगभग 480 अरब डॉलर था, अब घटकर करीब 371 अरब डॉलर रह गया है।

​वैश्विक रैंकिंग और अन्य देशों की स्थिति

​अमेरिकी ट्रेजरी के प्रमुख विदेशी धारकों की सूची में भारत वर्तमान में 14वें स्थान पर है:

​शीर्ष धारक: जापान 1,068.3 अरब डॉलर की होल्डिंग के साथ दुनिया का सबसे बड़ा विदेशी धारक बना हुआ है (जुलाई में यह 1,103.9 अरब डॉलर था)।

​अन्य प्रमुख देश: यूनाइटेड किंगडम (1,009.5 अरब डॉलर) के साथ दूसरे और मुख्य भूमि चीन तीसरे स्थान पर है। इसके बाद बेल्जियम (490.5 अरब डॉलर), कनाडा (464.6 अरब डॉलर), केमैन आइलैंड्स (463 अरब डॉलर) और लक्जमबर्ग (448.2 अरब डॉलर) का स्थान है।

​एशियाई देशों की स्थिति में हांगकांग 261.5 अरब डॉलर के साथ भारत से आगे है, जबकि नॉर्वे 214 अरब डॉलर के साथ भारत के ठीक पीछे (15वें स्थान) है।

​कुल टीआईसी प्रवाह (TIC Inflows)

​यूएस ट्रेजरी के अनुसार, अगस्त महीने में कुल 199.8 अरब डॉलर का नेट टीआईसी इनफ्लो दर्ज किया गया। विदेशी निवासियों ने दीर्घकालिक अमेरिकी सिक्योरिटीज में अपनी होल्डिंग्स बढ़ाईं (शुद्ध खरीदारी 300.7 अरब डॉलर रही), हालांकि उन्होंने अमेरिकी ट्रेजरी बिलों में अपनी होल्डिंग 47.8 अरब डॉलर कम कर दी।

​सितंबर 2026 के आंकड़ों को कवर करने वाली अगली टीआईसी रिपोर्ट आगामी 18 नवंबर को जारी की जाएगी।

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