Saturday, October 17, 2026
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नेपाल के नए पीएम बालेन्द्र शाह के संभावित भारत दौरे से पहले बड़े ‘सहायता पैकेज’ की उम्मीद, सीमा और हवाई मार्गों पर भी होगी बात

नेपाल के नए पीएम बालेन्द्र शाह के संभावित भारत दौरे से पहले बड़े ‘सहायता पैकेज’ की उम्मीद, सीमा और हवाई मार्गों पर भी होगी बात

​काठमांडू / नई दिल्ली:

​नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह आगामी 22 या 23 नवंबर 2026 को भारत के अपने पहले आधिकारिक द्विपक्षीय दौरे पर नई दिल्ली आ सकते हैं। काठमांडू स्थित विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल दौरे के दौरान नेपाल भारत सरकार से एक ‘बड़े वित्तीय और विकास सहायता पैकेज’ की मांग रख सकता है।

​नेपाल के प्रधानमंत्री की प्रेस सलाहकार दीपा दहल ने बताया कि नवंबर के अंतिम दिनों में पीएम शाह की भारत यात्रा लगभग तय है, जिसकी अंतिम तारीखों और आधिकारिक कार्यक्रम को विदेश मंत्रालय द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है।

​विनाशकारी बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के लिए सहायता की दरकार

​पीएम बालेन्द्र शाह का यह भारत दौरा ऐसे समय में प्रस्तावित है जब नेपाल 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के संकट से उबरने की कोशिश कर रहा है:

​भारी तबाही: ‘नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी’ के अनुसार, भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ़ से लगभग 1,500 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।

​अरबों डॉलर का नुकसान: बाढ़ में कई जलविद्युत संयंत्र, सड़कें, पुल और बस्तियां बह गईं। नेपाल सरकार को पुनर्निर्माण के लिए भारी-भरकम धनराशि की आवश्यकता है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि नेपाल कम शर्तों (कम प्रक्रियाओं) वाले वित्तीय अनुदान की मांग करेगा ताकि पुनर्निर्माण कार्य तेजी से पूरा हो सके।

​मौजूदा भारत-नेपाल क्रेडिट लाइन: भारत वर्तमान में नेपाल में कुल 1.65 बिलियन अमेरिकी डॉलर (1.65 अरब डॉलर) की चार ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ (LOC) संचालित कर रहा है, जिसके तहत बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाएं चलाई जा रही हैं।

​हवाई मार्ग (Air Routes) और व्यापार संधि पर चर्चा

​नेपाल इस दौरे के दौरान केवल वित्तीय मदद ही नहीं, बल्कि कई लंबे समय से पेंडिंग मुद्दों पर ठोस नतीजे चाहता है:

​नए एयर-एंट्री रूट्स की मांग: नेपाल के दो नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों—पोखरा और भैरहवा—को सुचारू रूप से चलाने के लिए नेपाल जनकपुर, भैरहवा और नेपालगंज के जरिए भारतीय हवाई क्षेत्र से नए प्रवेश मार्ग (Air-Entry Routes) मांग रहा है। भारत गोरखपुर एयर बेस जैसे संवेदनशील सैन्य ठिकानों और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट की सुरक्षा चिंताओं के कारण इस पर सतर्कता बरत रहा है।

​व्यापार संधि और BIS प्रमाणन बाधाएं: नेपाल ‘नेपाल-भारत व्यापार संधि’ की समीक्षा चाहता है। इसके अलावा, नेपाली सीमेंट, स्टील, प्लाईवुड और जूतों के निर्यात पर ‘ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स’ (BIS) से प्रमाण-पत्र लेने की शर्त के कारण हो रही देरी जैसी गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने की मांग रखी जाएगी।

​सीमा विवाद: लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा के सीमा विवाद पर भी बातचीत की संभावना है, जो उत्तराखंड राज्य का अभिन्न अंग हैं।

​संयुक्त उद्घाटन व शिलान्यास की तैयारी

​दौरे के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्री भारत के सहयोग से बनी कई प्रमुख परियोजनाओं का संयुक्त रूप से उद्घाटन कर सकते हैं, जिनमें:

​पनौती (कावरेपालानचोक) में नेपाल पुलिस अकादमी।

​दार्चुला में एक नया पुल और भैरहवा में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP)।

​दोधारा चांदनी में नए ‘इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट’ और ‘लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना’ के निर्माण कार्य की आधारशिला रखी जा सकती है।

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