सीजेआई के खिलाफ बयानबाजी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत और निखिल वागले को भेजा अवमानना का कारण बताओ नोटिस
सीजेआई के खिलाफ बयानबाजी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत और निखिल वागले को भेजा अवमानना का कारण बताओ नोटिस
नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (16 अक्टूबर 2026) को शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ (SCBA) द्वारा दायर एक आपराधिक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए की गई है, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ उनकी कथित विवादित टिप्पणियों से जुड़ी हुई है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने दोनों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कानूनी कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। हालांकि, शीर्ष अदालत ने फिलहाल दोनों को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी है।
क्या था पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से व्यक्तिगत मुलाकात कर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया था। सीजेआई ने स्पष्ट किया था कि विचारधीन/लंबित मामलों पर व्यक्तिगत चर्चा ‘शक्तियों के पृथक्करण’ के संवैधानिक मूल ढांचे के विपरीत होगी।
इसके बाद:
संजय राउत का बयान: 12 अक्टूबर को मीडिया से बात करते हुए संजय राउत ने दावा किया था कि उन्होंने सीजेआई सहित कई न्यायाधीशों को लंदन में भाजपा नेताओं के साथ बैडमिंटन खेलते देखा था।
निखिल वागले का पोस्ट: पत्रकार वागले ने 11 अक्टूबर को अपने सोशल मीडिया (X) हैंडल पर सीजेआई को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट किया था।
अदालत की टिप्पणियां और कानूनी रुख
सुनवाई के दौरान एससीबीए (SCBA) के वरिष्ठ वकील प्रदीप राय ने कहा कि बार एसोसिएशन अवमानना याचिका लाने से दुखी है, लेकिन ऐसी संस्थागत छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयानों को नजरअंदाज करना गलत परंपरा शुरू कर सकता है।
सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी: चीफ जस्टिस ने अफसोस जताते हुए कहा कि अदालतें जनता के अधिकारों की रक्षा में हमेशा आगे रही हैं, फिर भी आलोचना जारी रहती है। लोग यह नहीं समझ पाते कि उकसाने वाले लोग उन्हें जाल में फंसा रहे हैं।
सॉलिसिटर जनरल की प्रतिक्रिया: कोर्ट में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुछ लोग यह सोचते हैं कि ऐसी टिप्पणियों से न्यायपालिका पर दबाव बनाया जा सकता है, लेकिन ऐसी कोशिशें पूरी तरह बेकार हैं।
निखिल वागले ने मांगी बिना शर्त माफी
इस बीच, वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को पत्र लिखकर जानकारी दी है कि उन्होंने अपनी विवादित पोस्ट हटा दी है और सीजेआई व सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांग ली है। उन्होंने स्वीकार किया कि वह पोस्ट हताशा में दी गई एक भावनात्मक प्रतिक्रिया थी, जिसका उन्हें गहरा खेद है।
एसआईआर (SIR) याचिका और संजय राउत का आचरण
एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिका पर नोटिस जारी कर (जवाब की तारीख 27 अक्टूबर तय कर) इसे लंबित मामलों के साथ जोड़ दिया है।
इसी याचिका में संजय राउत भी सह-याचिकाकर्ता हैं। पीठ ने राउत की याचिका को केवल अस्थायी (Provisional) आधार पर स्वीकार किया है और निर्देश दिया है कि उन्हें अगली सुनवाई पर अपने सार्वजनिक आचरण और बयानों पर स्पष्टीकरण देना होगा, जिसके बाद ही उनकी याचिका पर अंतिम फैसला होगा।

