Friday, October 16, 2026
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उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र: 27 अक्टूबर से गैरसैंण के भराड़ीसैंण में होगा शुरू, 31 विधायकों ने पूछे 426 सवाल

उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र: 27 अक्टूबर से गैरसैंण के भराड़ीसैंण में होगा शुरू, 31 विधायकों ने पूछे 426 सवाल

​देहरादून / गैरसैंण:

​उत्तराखंड की पंचम विधानसभा का वर्ष 2026 का तीसरा सत्र आगामी 27 अक्टूबर से गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में शुरू होने जा रहा है। राज्यपाल की औपचारिक स्वीकृति के बाद सत्र बुलाए जाने की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सत्र की तैयारियों, व्यवस्थाओं और विधायकों द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों की विस्तृत जानकारी साझा की है।

​27 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से होगी शुरुआत

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित ग्रीष्मकालीन राजधानी के विधानसभा भवन में 27 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से सदन की कार्यवाही आरंभ होगी। सत्र के सुचारू संचालन और सुरक्षा व्यवस्थाओं को पुख्ता करने के लिए विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं, ताकि कार्यवाही के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

​31 विधायकों की ओर से आए 426 सवाल

आगामी सत्र को लेकर जनप्रतिनिधियों में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष के मुताबिक, सत्र के लिए अब तक 31 विधायकों की ओर से कुल 426 सवाल विधानसभा सचिवालय को प्राप्त हो चुके हैं। इन प्रश्नों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और अन्य बुनियादी विकास कार्यों से जुड़े जनहित के तमाम अहम मुद्दे शामिल हैं। सचिवालय का यह प्रयास रहेगा कि सभी उठाए गए सवालों पर सरकार की ओर से समय पर जवाब सुनिश्चित किया जाए, जिससे जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार का पक्ष स्पष्ट हो सके।

​सत्र की अवधि और सरकार के अधिकार पर बयान

पत्रकारों द्वारा सत्र की अवधि कम होने और चर्चा के लिए पर्याप्त समय मिलने को लेकर उठाए गए सवाल पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने स्पष्ट किया कि सत्र का आयोजन स्थल और उसकी अवधि तय करना पूरी तरह से सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। विधानसभा सचिवालय की जिम्मेदारी तय कार्यक्रम के अनुसार सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित ढंग से संचालित करना है। उन्होंने भरोसा जताया कि यदि सत्र की अवधि सीमित भी रहती है, तो उपलब्ध समय का अधिकतम सदुपयोग करते हुए अधिक से अधिक विधायकों को जनसमस्याएं उठाने का अवसर दिया जाएगा।

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