उत्तराखंड में ‘गधे-घोड़े’ बयान पर गरमाई सियासत: हरक सिंह रावत ने मंत्री मनवीर चौहान और बीजेपी सरकार को घेरा
उत्तराखंड में ‘गधे-घोड़े’ बयान पर गरमाई सियासत: हरक सिंह रावत ने मंत्री मनवीर चौहान और बीजेपी सरकार को घेरा
देहरादून:
उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों ‘गधे और घोड़े’ वाले बयान को लेकर घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान पर तीखा हमला बोला है। हरक सिंह रावत ने इस बयान को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि इससे बीजेपी नेताओं की मानसिकता और उनके पदों का हल्कापन झलकता है।
मनवीर चौहान के बयान पर हरक सिंह का पलटवार
हाल ही में बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले नेताओं को लेकर कहा था कि “शायद कांग्रेस में रहते हुए उनके विचार ‘गधे-घोड़े’ जैसे थे, लेकिन बीजेपी में आते ही उनकी विचारधारा में सुधार हो गया, क्योंकि बीजेपी वैचारिक पार्टी है।”
इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए हरक सिंह रावत ने पलटवार किया और कहा कि:
मनवीर चौहान खुद 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में यमुनोत्री सीट से टिकट के दावेदार रहे हैं, लेकिन उनकी अपनी पार्टी ने ही उन्हें कभी टिकट के योग्य नहीं समझा। जिस व्यक्ति को खुद बीजेपी ने कभी गंभीरता से नहीं लिया, आज वह इस तरह के बचकाने और ओछे बयान दे रहे हैं।
बीजेपी के मंत्रियों की चुप्पी पर भी खड़े किए सवाल
हरक सिंह रावत ने इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार के मंत्रियों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि मनवीर चौहान का यह अप्रत्यक्ष तंज दरअसल सरकार के उन कद्दावर मंत्रियों के लिए था, जो पहले कांग्रेस में हुआ करते थे।
उन्होंने नाम गिनाते हुए कहा कि यह बयान परोक्ष रूप से कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल, राम सिंह कैडा, प्रदीप बत्रा और रेखा आर्य के लिए दिया गया है। हरक सिंह ने हैरानी जताते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है कि जब बीजेपी के ही एक पदाधिकारी ने इन मंत्रियों को ‘गधे-घोड़े’ कहा, तब भी इन वरिष्ठ मंत्रियों की तरफ से कोई तीखी प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया। उन्होंने कहा, “मंत्री पद इतना बड़ा हो गया है कि जब आपको सरेआम ‘गधे-घोड़े’ कहा जा रहा हो और आप तब भी कोई प्रतिक्रिया न दें, यह समझ से परे है।”
इस बयानबाजी के बाद से उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में तापमान काफी बढ़ गया है और पक्ष-विपक्ष के बीच तीखे बयानों का दौर जारी है।

