राजनीति

राहुल गांधी की नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस: प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और चुनाव आयोग पर बोला तीखा हमला, पुलिसिया कार्रवाई पर उठाए सवाल

राहुल गांधी की नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस: प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और चुनाव आयोग पर बोला तीखा हमला, पुलिसिया कार्रवाई पर उठाए सवाल

​नई दिल्ली:

​लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उनके साथ कुछ युवा और छात्र भी मौजूद थे, जिन्होंने पुलिस हिरासत और प्रदर्शन के दौरान हुई कथित ज्यादतियों के बारे में अपने अनुभव साझा किए। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार, गृह मंत्री अमित शाह, चुनाव आयोग और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अन्याय के खिलाफ यह लड़ाई किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे देश की आवाज है।

​”अमित शाह जी, इसे अच्छी तरह देखिए, यह भारत की आवाज है”

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा:

​”जैसा कि मैंने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, यह भारत है। अमित शाह जी, इसे अच्छी तरह देखिए। यहां कोई हिंदू नहीं, कोई मुसलमान नहीं, किसी खास जाति का कोई नहीं, कोई महिला नहीं, कोई पुरुष नहीं। एक ही आवाज है, एक ही विरोध है। यह भारत की आवाज है और आप इस आवाज के खिलाफ खड़े हैं। प्रधानमंत्री इस आवाज के खिलाफ खड़े हैं। मैं आपको सुझाव देता हूं कि इस आवाज के खिलाफ मत खड़े होइए। कोई भी इस आवाज के खिलाफ नहीं खड़ा होकर टिक नहीं सकता।”

​पुलिसकर्मियों द्वारा की जा रही कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे छात्रों से लगातार कह रहे हैं कि वे सभी वीडियो और साक्ष्य सुरक्षित रखें। उन्होंने दो टूक कहा, “जब यह पूरा मामला खत्म होगा, तो हम उन सभी सबूतों का उपयोग करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जिसे सजा मिलनी चाहिए उसे सजा मिले। प्रधानमंत्री से लेकर ज्ञानेश कुमार, अमित शाह और यहां तक कि वह सिपाही भी जो हमारे बच्चों पर हाथ उठा रहे हैं, उन सभी को सजा मिलेगी।”

​प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल छात्रों की आपबीती

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी के साथ आए छात्रों ने पुलिस हिरासत के दौरान हुई कथित प्रताड़ना की डरावनी दास्तां सुनाई:

​धर्मेंद्र कुमार ने बताया, “पुलिसकर्मियों ने हमसे कहा कि बोलो, दिल्ली पुलिस तुम्हारे पापा हैं। हमें बहुत मारा गया। हमसे अंकित कसाना नाम के एक पुलिसवाले ने कहा कि बुला ले अपने नेता को, तुम्हें कोई बचाने नहीं आएगा। हम फिर प्रोटेस्ट में जाएंगे, लेकिन अन्याय के खिलाफ झुकेंगे नहीं, लड़ेंगे और जीतेंगे।”

​समर्थ नाम के एक अन्य छात्र ने अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा, “हम लोग 4 अक्टूबर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे और 5 अक्टूबर को हमें हिरासत में लिया गया। फिर हमें पार्लियामेंट पुलिस स्टेशन ले जाकर वहाब सिंह तोमर नाम के पुलिसकर्मी के साथ 20 पुलिसवालों ने बुरी तरह से मारा। इसके बाद, हमें पीछे के रास्ते से निकाला गया और पार्लियामेंट पुलिस स्टेशन से दिल्ली कैंट तक कांस्टेबल अंकित कसाना मारते हुए ले गए। जब मेरे साथी धर्मेंद्र ने कहा कि उन्हें उल्टी आ रही है तो पुलिसवालों ने कहा कि अपना बैग खोलो और उसी में उल्टी करो।”

​विपक्ष और छात्र संगठनों द्वारा लगातार उठाए जा रहे इन गंभीर मुद्दों के बाद राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है।

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