राजनीति

दिल्ली का बंगला साहिब गुरुद्वारा बना सियासी अखाड़ा: आम आदमी पार्टी और बीजेपी आमने-सामने, जानिए पूरा विवाद

दिल्ली का बंगला साहिब गुरुद्वारा बना सियासी अखाड़ा: आम आदमी पार्टी और बीजेपी आमने-सामने, जानिए पूरा विवाद

​नई दिल्ली:

​साल 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक गुरुद्वारा बंगला साहिब राजनीतिक दलों के बीच तीखे टकराव का नया केंद्र बन गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों और छात्रों के गुरुद्वारा परिसर में दाखिल होने तथा उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है।

​आम आदमी पार्टी (AAP) का रुख और आरोप

आम आदमी पार्टी ने इस पूरी घटना को सिख धार्मिक भावनाओं और गुरुद्वारे की पवित्र मर्यादा पर सीधा हमला करार दिया है।

​पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दिल्ली पुलिस की कथित कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया कि गुरुद्वारे में पुलिस भेजने की इतनी जल्दी क्या थी। उन्होंने ‘इक ओंकार’ और इंसानियत के सिद्धांतों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सिर ढके बिना और जूते पहने पुलिसकर्मियों का गुरुद्वारे के भीतर प्रवेश करना धार्मिक स्थल की गरिमा के खिलाफ है।

​आप नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि इस घटना ने सिख समुदाय की पुरानी पीड़ाओं को हवा दी है।

​बीजेपी और गुरुद्वारा प्रबंधन का पलटवार

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (DSGMC) ने आम आदमी पार्टी के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक स्टंट बताया है।

​वरिष्ठ नेता एच.एस. फूलका और डीएसजीएमसी के नेताओं ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि ‘आप’ और उससे जुड़े प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक फायदे के लिए गुरुद्वारा परिसर का दुरुपयोग किया और उसकी पवित्रता को ठेस पहुंचाई है।

​दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के महासचिव हरमीत सिंह कालका ने साफ कहा कि “गुरु का घर आस्था का केंद्र है, राजनीतिक विरोध या रोटियां सेकने का मंच नहीं।” समिति ने इस मामले में अरविंद केजरीवाल और अन्य ‘आप’ नेताओं के खिलाफ पुलिस में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है। वहीं, पुलिस और गुरुद्वारा अधिकारियों का यह भी कहना है कि सुरक्षाकर्मी मुख्य पवित्र स्थल के अंदर दाखिल नहीं हुए थे, बल्कि स्थिति को संभालने के लिए बाहर ही तैनात रहे।

​पंजाब की राजनीति पर असर

चूंकि पंजाब की राजनीति में बेअदबी, पंथक मुद्दे और धार्मिक संस्थाओं की मर्यादा हमेशा से बेहद संवेदनशील और निर्णायक मुद्दे रहे हैं, इसलिए इस विवाद का असर आगामी चुनावी समीकरणों पर पड़ना तय माना जा रहा है। एक तरफ ‘आप’ इसे धार्मिक अस्मिता से जोड़कर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटी है, तो वहीं बीजेपी और अन्य दल इसे ‘आप’ की राजनीतिक अवसरवादिता करार दे रहे हैं।

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