अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले हफ्ते आएंगे भारत दौरे पर, मुंबई और जामनगर में ऊर्जा सहयोग और व्यापार पर होगी चर्चा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले हफ्ते आएंगे भारत दौरे पर, मुंबई और जामनगर में ऊर्जा सहयोग और व्यापार पर होगी चर्चा
वाशिंगटन/नई दिल्ली:
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले हफ्ते भारत और उज्बेकिस्तान की आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी मीडिया नोट के अनुसार, रुबियो 17 से 22 अक्टूबर 2026 तक उज्बेकिस्तान के समरकंद और भारत के मुंबई तथा जामनगर के दौरे पर रहेंगे। इस यात्रा का मुख्य केंद्रबिंदु भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करना तथा ‘बेहतर ऊर्जा सहयोग’ (Enhanced Energy Cooperation) पर चर्चा करना है।
रूस से ऊर्जा खरीद की समय सीमा के बीच अहम दौरा
मार्को रुबियो का यह भारत दौरा एक ऐसे समय में हो रहा है जब ‘ग्राहम एक्ट’ (Graham Act) के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी ड्यूटी या जुर्माना लगाए जाने की 18 अक्टूबर की समय सीमा बेहद नजदीक है। उल्लेखनीय है कि साल 2022 के बाद से भारत रूस से कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शुमार रहा है, और यह तेल आयात वाशिंगटन के साथ कूटनीतिक चर्चाओं में लगातार एक संवेदनशील विषय रहा है।
जामनगर को दौरे के लिए चुने जाने को भी काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह शहर रिलायंस इंडस्ट्रीज के विशाल रिफाइनिंग हब का घर है, जो दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में से एक है। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने विशेष रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि जामनगर को इस दौरे के लिए क्यों चुना गया है।
व्यापारिक नेताओं से मुलाकात और निवेश पर जोर
विदेश विभाग ने बताया कि अपनी इस यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री भारत के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे, जिसमें क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके अलावा, वह व्यावसायिक निवेश और आर्थिक सहयोग के नए अवसरों को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख व्यापारिक नेताओं से भी मिलेंगे।
मई में मार्को रुबियो ने भारत को एक ‘महान भागीदार’ करार देते हुए कहा था कि ऊर्जा सुरक्षा और ‘क्वाड’ (QUAD) उनके एजेंडे में सबसे ऊपर हैं।
समरकंद में ‘C5+1’ मंत्रिस्तरीय बैठक में लेंगे हिस्सा
भारत आने से पहले मार्को रुबियो उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित होने वाली C5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेंगे। यह एक कूटनीतिक मंच है जो अमेरिका और मध्य एशिया के पांच देशों—कजाकिस्तान, किर्गिज़ गणराज्य, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान—को आपस में जोड़ता है। इस दौरान वह 200 से अधिक अमेरिकी व्यापारिक नेताओं वाले एक वाणिज्यिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे, जिसका उद्देश्य अमेरिका और मध्य एशिया के बीच आर्थिक सहयोग के एक नए युग की शुरुआत करना है।

