सीजेपी और विपक्ष के प्रदर्शन पर भाजपा का करारा पलटवार, रविशंकर प्रसाद बोले—’हारे और हताश लोग कर रहे दिल्ली की जनता को परेशान’
सीजेपी और विपक्ष के प्रदर्शन पर भाजपा का करारा पलटवार, रविशंकर प्रसाद बोले—’हारे और हताश लोग कर रहे दिल्ली की जनता को परेशान’
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) तथा विपक्षी दलों द्वारा दिल्ली में किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जोरदार पलटवार किया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष को घेरते हुए आरोप लगाया कि अपनी लगातार हार से बौखलाए और हताश लोग सड़क पर प्रदर्शन को हथियार बनाकर दिल्ली की जनता को हलकान कर रहे हैं।
रविशंकर प्रसाद के बयान और भाजपा के पलटवार से जुड़ी मुख्य बातें:
हालिया उपचुनाव नतीजों और जनता के आशीर्वाद का जिक्र: रविशंकर प्रसाद ने हाल ही में आए विभिन्न राज्यों के उपचुनावों में भाजपा-एनडीए की जीत का हवाला देते हुए कहा कि देश की जनता ने विकास और सुशासन पर अपना भरोसा दोहराया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ जनता भाजपा को आशीर्वाद दे रही है, तो दूसरी तरफ हताश विपक्ष दिल्ली की सड़कों पर खुराफात और अराजकता फैलाने का काम कर रहा है।
विपक्षी एकजुटता पर तंज और ‘ड्रामा’ करार: भाजपा नेता ने विपक्षी दलों की गुटबाजी पर कटाक्ष करते हुए कहा, “राहुल गांधी ने तीन दिन प्रदर्शन किया, फिर आम आदमी पार्टी की प्रॉक्सी कॉकरोच जनता पार्टी आई। सुबह से उनका नाटक चला और शाम होते-होते केजरीवाल, ममता बनर्जी और वामपंथी नेता भी कूद पड़े।” उन्होंने कहा कि लोकतंत्र ने अराजकता पर विजय प्राप्त की है।
EVM से लेकर SIR तक दोहरे रवैये का आरोप: रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जब भी विपक्ष कहीं जीतता है तो चुनाव प्रणाली और ईवीएम ठीक हो जाती है, लेकिन जब नरेंद्र मोदी जीतते हैं तो ईवीएम खराब बता दी जाती है। 2019 और 2024 के बाद जब ईवीएम का मुद्दा नहीं चला, तो अब विपक्ष एसआईआर (SIR) के नाम पर देश को गुमराह कर रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि देश में पहले भी 9 बार एसआईआर हो चुका है और इसका स्पष्ट कानून प्रावधान है।
13 करोड़ वोटरों के आंकड़ों का दिया ब्यौरा: विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे 13 करोड़ वोटरों के सवाल पर आंकड़े पेश करते हुए भाजपा सांसद ने पूछा कि क्या मृत या प्रवासी लोगों का नाम मतदाता सूची में बना रहना चाहिए? उन्होंने आंकड़े साझा किए:
2.89 करोड़: मृत पाए गए मतदाता
6.3 करोड़: जो अपने मूल स्थान से प्रवास (Shift) कर चुके हैं
1 करोड़: डुप्लीकेट मतदाता
3 करोड़: अनुपस्थित (Absent) मतदाता
बांग्लादेशी घुसपैठियों पर सवाल: उन्होंने कहा कि इन सभी आंकड़ों को मिलाकर संख्या लगभग 13 करोड़ तक पहुंचती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या फर्जी नाम और बांग्लादेशी घुसपैठिए देश के वैध मतदाता बनने चाहिए? यदि किसी को आंकड़ों पर आपत्ति है तो उन्हें सड़क पर उपद्रव मचाने के बजाय सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए।

