राजनीति

जम्मू-कश्मीर में बुरहान वानी पर फिर गरमाई सियासत, पीडीपी नेता अब्दुल कबीर के ‘शहीद’ वाले बयान पर विवाद

जम्मू-कश्मीर में बुरहान वानी पर फिर गरमाई सियासत, पीडीपी नेता अब्दुल कबीर के ‘शहीद’ वाले बयान पर विवाद

​जम्मू-कश्मीर की राजनीति में हिजबुल मुजाहिद्दीन के कुख्यात आतंकवादी कमांडर बुरहान वानी को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। किश्तवाड़ जिले में आयोजित पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता अब्दुल कबीर द्वारा बुरहान वानी को ‘शहीद’ बताए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कश्मीरी विस्थापित संगठनों ने तीखी आपत्ति जताई है।

​किश्तवाड़ विवाद और बुरहान वानी प्रकरण से जुड़ी मुख्य बातें:

​पीडीपी नेता का विवादित बयान: किश्तवाड़ में आयोजित पार्टी कार्यक्रम के दौरान अब्दुल कबीर ने अपने भाषण में कहा कि, “जब बुरहान वानी सुरक्षा बलों के हाथों मारा गया था, तब भाजपा के नेताओं ने खुद उसके घर जाकर मुआवजा पहुंचाया था।” इसके बाद जब पत्रकारों ने एक घोषित आतंकवादी को ‘शहीद’ कहे जाने पर सवाल किया, तो वे अपनी बात पर अड़े रहे और कहा कि लोकतांत्रिक देश में उन्हें जो महसूस होता है, उसे कहने की पूरी आजादी है।

​बुरहान वानी का इतिहास: बुरहान वानी हिजबुल मुजाहिद्दीन का पोस्टर बॉय और कमांडर था, जो सोशल मीडिया के माध्यम से कश्मीर के युवाओं को हथियार उठाने और हिंसा के लिए उकसाता था। 8 जुलाई 2016 को सुरक्षा बलों ने अनंतनाग जिले के कोकरनाग में एक मुठभेड़ के दौरान उसे मार गिराया था। उसकी मौत के बाद कश्मीर घाटी में महीनों तक भारी हिंसा और उपद्रव का दौर चला था।

​बीजेपी और विस्थापित संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया: इस बयान के बाद सियासत गरमा गई है। विस्थापित कश्मीरी पंडितों के संगठन ‘रूट्स इन कश्मीर’ के प्रवक्ता अमित रैना ने पीडीपी नेता की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि एक मारे गए आतंकवादी को शहीद कहना आतंकवाद के शिकार परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने के समान है। वहीं, वरिष्ठ बीजेपी नेता युद्धवीर सेठी ने इस बयान को चौंकाने वाला और अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि पीडीपी नेताओं को देश के लिए जान न्यौछावर करने वाले सैनिकों के परिवारों से माफी मांगनी चाहिए।

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