स्वास्थ्य और चिकित्सा: ब्रेन स्ट्रोक क्या है और ‘BE FAST’ फॉर्मूला से कैसे बचाएं जान
स्वास्थ्य और चिकित्सा: ब्रेन स्ट्रोक क्या है और ‘BE FAST’ फॉर्मूला से कैसे बचाएं जान
हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील और ताकतवर अंग हमारा मस्तिष्क (दिमाग) है, जो हमारे हर विचार, हरकत, बोली और भावना को संचालित करता है। लेकिन जब इसी दिमाग को मिलने वाली ऑक्सीजन और खून की सप्लाई अचानक बंद हो जाती है, तो इस आपात स्थिति को ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) कहा जाता है।
अक्सर लोग इसे दिल के दौरे (हार्ट अटैक) जैसा मान लेते हैं, लेकिन स्ट्रोक असल में ‘दिमाग का दौरा’ है। जब दिमाग की किसी नस में खून का थक्का जम जाता है (इस्कीमिक स्ट्रोक) या कोई कमजोर नस अचानक फट जाती है (हेमरेजिक स्ट्रोक), तो मस्तिष्क की कोशिकाएं प्रति मिनट लाखों की संख्या में नष्ट होने लगती हैं।
स्ट्रोक की तुरंत पहचान का जीवनमंत्र: ‘BE FAST’ फॉर्मूला
स्ट्रोक बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक आता है। ऐसे में सही समय पर लक्षणों की पहचान करना मरीज की जिंदगी बचा सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने इसके लिए ‘BE FAST’ फॉर्मूला दिया है:
B – Balance (संतुलन खोना): मरीज का अचानक चलते-चलते लड़खड़ाना, पैर डगमगाना या तेज चक्कर आना।
E – Eyes (आंखों की रोशनी): एक या दोनों आंखों से अचानक धुंधला दिखना, डबल विजन या कुछ पलों के लिए अंधेरा छा जाना।
F – Face (चेहरा टेढ़ा होना): मुस्कुराते समय चेहरे का एक तरफ लटक जाना, मुंह का कोना टेढ़ा होना या लार टपकना।
A – Arm (हाथ या पैर की कमजोरी): दोनों हाथ ऊपर उठाने को कहने पर एक हाथ का अपने आप नीचे गिर जाना या उसमें भारीपन और सुन्नता महसूस होना।
S – Speech (बोली में लड़खड़ाहट): बोलने में लड़खड़ाहट होना, शब्द साफ न निकलना या दूसरों की बात समझने में असमर्थ होना।
T – Time (समय का महत्व): इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर एक सेकंड भी बर्बाद न करें, तुरंत एम्बुलेंस (108) को कॉल करें या न्यूरोलॉजी सुविधा वाले अस्पताल की ओर निकलें।
गोल्डन आवर (स्वर्णिम काल) की अहमियत
चिकित्सा विज्ञान में स्ट्रोक के शुरुआती 3 से 4.5 घंटे को गोल्डन आवर कहा जाता है। यदि मरीज इस समय सीमा के भीतर अस्पताल पहुंच जाता है, तो डॉक्टर थक्का घुलाने वाली विशेष दवा (tPA) या ‘मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी’ तकनीक से उसकी जान और दिमागी क्षमता बचा सकते हैं। याद रखें—Time is Brain (समय ही दिमाग है)।
क्या करें और किन गलतियों से बचें?
घरेलू नुस्खे न आजमाएं: तेल की मालिश करना, प्याज सुंघाना, कान में सुई चुभोना या नींबू पानी पिलाना जानलेवा साबित हो सकता है।
खाने-पीने को कुछ न दें: स्ट्रोक के दौरान पानी या दवा देने पर वह सांस की नली में जा सकती है, जिससे दम घुट सकता है।
खुद डॉक्टर न बनें: बिना डॉक्टर की जांच के एस्पिरिन जैसी खून पतली करने वाली दवा न दें, क्योंकि ब्रेन हेमरेज होने पर यह जानलेवा हो सकता है।
सही अस्पताल चुनें: मरीज को सीधे ऐसे अस्पताल ले जाएं जहां 24 घंटे सीटी स्कैन, आईसीयू और न्यूरोलॉजिस्ट की सुविधा हो।
बचाव के उपाय
उच्च रक्तचाप (हाई बीपी), डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, अत्यधिक तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके मुख्य कारण हैं। बीपी और शुगर को नियंत्रित रखकर, नियमित 30 मिनट टहलकर और स्वस्थ खानपान अपनाकर स्ट्रोक के 80% मामलों को रोका जा सकता है। आपकी थोड़ी सी सजगता किसी की जान बचा सकती है।

