प्रदोष व्रत और पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत और पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, यात्रा, निवेश या धार्मिक अनुष्ठान से पहले वार, तिथि, नक्षत्र और करण की स्थिति को देखना बेहद शुभ फलदायी होता है। पंचांग मुख्य रूप से सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित काल-गणना पद्धति है।
आने वाला कल यानी 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास और पावन रहने वाला है। आइए जानते हैं इस दिन के पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त और विशेष योगों के बारे में संपूर्ण जानकारी:
मुख्य पंचांग विवरण:
वार: गुरुवार (भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित)
मास एवं पक्ष: आश्विन मास, कृष्ण पक्ष
तिथि: त्रयोदशी तिथि (रात्रि 10:16 बजे तक, जिसके उपरांत चतुर्दशी आरंभ होगी)
व्रत पर्व: प्रदोष व्रत (भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष काल को अत्यंत उत्तम माना जाता है)
नक्षत्र: पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र (9 अक्टूबर की सुबह 6:32 बजे तक रहेगा)
योग: वरियान योग (रात्रि 3:41 बजे तक)
करण: कौलव करण (सुबह 8:46 बजे तक)
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति:
सूर्योदय: सुबह 6:19 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:47 बजे
चंद्रोदय: 9 अक्टूबर की सुबह 2:48 बजे
चंद्रास्त: शाम 4:28 बजे
प्रदोष व्रत और शिव पूजा का मुहूर्त:
प्रदोष व्रत के दिन शाम के समय भगवान शिव की उपासना करने का विधान है। इस दिन प्रदोष काल शाम 5:59 बजे से रात 8:27 बजे तक रहेगा। इस दौरान भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। मान्यता है कि इस समय सच्ची श्रद्धा से पूजा करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
शुभ और अशुभ मुहूर्त (अभिजीत और राहुकाल):
अभिजीत मुहूर्त (शुभ कार्य के लिए): सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 1:29 बजे से 2:55 बजे तक (इस दौरान नए या शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है)
गुलिक काल: सुबह 9:03 बजे से 10:29 बजे तक
यमगंड काल: सुबह 6:17 बजे से 7:43 बजे तक
दिशाशूल:
पंचांग के अनुसार, गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहता है। इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना बेहद आवश्यक हो, तो उचित उपाय और नियमों का पालन करते हुए यात्रा शुरू की जा सकती है।

