फ्रांस में बदहाल शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलन उग्र: लेंस शहर में प्रदर्शन के दौरान छात्र का हाथ उड़ा, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
फ्रांस में बदहाल शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलन उग्र: लेंस शहर में प्रदर्शन के दौरान छात्र का हाथ उड़ा, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
फ्रांस में स्कूलों के जर्जर हालात, शिक्षकों की कमी और शिक्षा के गिरते स्तर के खिलाफ छात्रों का गुस्सा अब एक बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बदल गया है। देशभर के हजारों छात्रों, शिक्षकों, ट्रेड यूनियनों और अभिभावक संगठनों ने मंगलवार को सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस बीच, उत्तरी शहर लेंस में प्रदर्शन के दौरान एक 15 वर्षीय छात्र का हाथ उड़ जाने की दर्दनाक घटना ने पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा प्रबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आंदोलन और ताजा घटनाक्रम से जुड़े मुख्य बिंदु:
लेंस में गंभीर हादसा: स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को लेंस में एक हाई स्कूल के बाहर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए गए स्टन ग्रेनेड को उठाने के बाद हुए विस्फोट में 15 वर्षीय छात्र का हाथ उड़ गया। पास-दे-कलै के प्रीफेक्ट ने घटना और उसकी जांच की पुष्टि की है, हालांकि उन्होंने विस्फोट के स्पष्ट कारणों पर अभी आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
देशव्यापी प्रदर्शन और विरोध दिवस: छात्र संगठनों, शिक्षकों और ट्रेड यूनियनों ने मंगलवार को राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस का आह्वान किया है। शिक्षा मंत्री एडुआर जफ्रे के मुताबिक, देश के हजारों हाई स्कूल आंशिक या पूर्ण रूप से प्रभावित रहे हैं, जबकि लगभग 40 विश्वविद्यालय परिसरों में भी छात्रों ने समर्थन में प्रदर्शन किए हैं।
आंदोलन के मुख्य कारण: छात्र लंबे समय से फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था में कम निवेश, शिक्षकों की भारी कमी, खस्ताहाल स्कूल भवन और जरूरत से ज्यादा भीड़भाड़ वाली कक्षाओं को लेकर विरोध जता रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार शिक्षा सुधारों को लेकर गंभीर नहीं है।
हिंसा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम: पिछले कुछ दिनों में कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं। दर्जनों स्कूलों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद राजधानी पेरिस समेत कई बड़े शहरों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है।
फ्रांसीसी सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करते हुए हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की सख्त निंदा की है। वहीं, छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार और उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा।

