सर्व पितृ अमावस्या: महत्व, पितृ दोष से मुक्ति के उपाय और पूजा की विधि
सर्व पितृ अमावस्या: महत्व, पितृ दोष से मुक्ति के उपाय और पूजा की विधि
आश्विन मास की अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या (पितृ विसर्जन) के रूप में मनाया जाता है। यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है, जिसका धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पितरों का स्मरण, तर्पण और पूजा-पाठ करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही, इस दिन पितृ दोष से जुड़ी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए कुछ विशेष धार्मिक उपाय भी किए जाते हैं।
पितृ दोष से राहत के लिए करें ये उपाय:
मंत्र जाप: सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक निम्नलिखित मंत्र का जाप किया जा सकता है, जो उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का माध्यम माना जाता है:
मंत्र: ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः।।
शिव आराधना और शिव चालीसा का पाठ: इस दिन भगवान शिव की आराधना करना बेहद फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु भगवान शिव का ध्यान कर शिव चालीसा का पाठ कर सकते हैं। मान्यता है कि शिव जी की कृपा से मानसिक शांति मिलती है और संकटों से मुक्ति की कामना पूरी होती है। पाठ करने से पहले भगवान गणेश और शिवजी का स्मरण कर सामान्य पूजा करनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इन उपायों को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हो सकती हैं।

