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चुनाव आयोग का निर्देश: 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छूटे हुए योग्य और युवा वोटरों को जोड़ने के लिए चलेगा ‘स्पेशल ड्राइव’

चुनाव आयोग का निर्देश: 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छूटे हुए योग्य और युवा वोटरों को जोड़ने के लिए चलेगा ‘स्पेशल ड्राइव’

​भारतीय निर्वाचन आयोग ने देश के उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चुनाव अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं, जहां वोटर लिस्ट का ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) पूरा हो चुका है। आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो योग्य नागरिक या युवा वोटर लिस्ट में शामिल होने से छूट गए हैं, उन्हें इस स्पेशल ड्राइव के जरिए जोड़ा जा सके।

​मुख्य बिंदु:

​स्पेशल ड्राइव की शुरुआत: पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी सहित कई राज्यों के अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को छूटे हुए और पहली बार वोट देने वाले योग्य नागरिकों के नाम जुड़वाने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है।

​’फॉर्म 6′ का उपयोग: जिन लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के दौरान या उसके बाद छूट गए हैं, वे लगातार अपडेट प्रक्रिया के तहत ‘फॉर्म 6’ भरकर अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

​हटाए गए नामों की स्थिति: SIR के दौरान विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से लगभग 13 करोड़ नाम हटाए गए थे। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ये सभी योग्य वोटर थे, क्योंकि इनमें मृत, स्थानांतरित या अयोग्य प्रविष्टियां भी शामिल थीं।

​गोवा का विशेष उदाहरण: गोवा के मुख्य चुनाव अधिकारी ने सामने आए मामलों (जैसे विदेश में होना या पुर्तगाली पासपोर्ट धारक होना) के आधार पर बूथ-लेवल अधिकारियों (BLO) को निर्देश दिए हैं कि वे सीधे छूटे हुए योग्य वोटरों के घर जाकर उनके एनरोलमेंट फॉर्म एकत्र करें, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का अधिकार न छूटे।

​इस स्पेशल ड्राइव का पूरा फोकस पात्र नागरिकों और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को पारदर्शी तरीके से मतदाता सूची का हिस्सा बनाने पर है।

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