यूपीएससी के 100 साल पूरे होने पर पीएम मोदी का संबोधन: ‘नेशन फर्स्ट’ और ‘सिटीजन फर्स्ट’ को बताया गवर्नेंस का आधार
यूपीएससी के 100 साल पूरे होने पर पीएम मोदी का संबोधन: ‘नेशन फर्स्ट’ और ‘सिटीजन फर्स्ट’ को बताया गवर्नेंस का आधार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 100 वर्ष पूरे होने के इस खास अवसर को देश के लिए गर्व का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि बीते एक सदी में इस संस्था ने देश के प्रशासन और जनसेवा में बेहद अहम भूमिका निभाई है।
संबोधन की मुख्य बातें और बिंदु:
सरदार पटेल का योगदान: पीएम मोदी ने देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को याद करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश को एकजुट करने और राष्ट्र चलाने की बड़ी चुनौती थी, जिसे सरदार पटेल ने बखूबी निभाया और यूपीएससी को आजाद भारत का एक प्रमुख व सशक्त स्तंभ बनाया।
बदलती प्राथमिकताएं: साल 1926 में जब इस संस्था की नींव रखी गई थी, तब इसकी प्राथमिकताएं ब्रिटिश सरकार के प्रति जवाबदेह थीं, लेकिन स्वतंत्र भारत में इसकी भूमिका और प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं।
दो प्रमुख कसौटियां (नेशन फर्स्ट और सिटीजन फर्स्ट): प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज जिन युवाओं का चयन हो रहा है, वे ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके लिए हर चयन को दो मुख्य कसौटियों पर कसा जाना चाहिए— ‘नेशन फर्स्ट’ (राष्ट्र प्रथम) और ‘सिटीजन फर्स्ट’ (नागरिक प्रथम)।
बदलती तकनीक और AI का दौर: आज का भारत ‘नागरिक देवो भवः’ के मंत्र और नई कार्यसंस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है। आज AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और आधुनिक तकनीक के इस दौर में सिविल सेवकों को बिल्कुल अलग और नई तरह की चुनौतियों के बीच काम करना होगा।
बढ़ती विविधता और महिलाओं की भागीदारी: पीएम ने कहा कि कभी यूपीएससी में सिर्फ बड़े शहरों और बड़े घरों के बच्चों को मौका मिलता था, लेकिन अब दूर-दराज के गांवों और कस्बों के युवा भी इसमें सफलता हासिल कर रहे हैं। इसके अलावा, यूपीएससी के पूरे इतिहास में अब तक कुल 4 महिला चेयरपर्सन रही हैं, जिनमें से 3 महिला चेयरपर्सन 2014 के बाद ही बनी हैं, जो महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
