अफगानिस्तान में पाकिस्तान के बढ़ते सैन्य हस्तक्षेप और हवाई हमलों पर रिपोर्ट: रणनीतिक विफलता और घरेलू राजनीति का नया दौर
अफगानिस्तान में पाकिस्तान के बढ़ते सैन्य हस्तक्षेप और हवाई हमलों पर रिपोर्ट: रणनीतिक विफलता और घरेलू राजनीति का नया दौर
’पारहेशिया न्यूज’ की एक रिपोर्ट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच के मौजूदा तनाव, पाकिस्तानी सैन्य रणनीतियों और वहां हो रहे हवाई हमलों को लेकर गंभीर खुलासे किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, काबुल में अपनी मनमर्जी चलाने और प्रभाव जमाने में नाकाम रहने के बाद अब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में सीधे तौर पर सैन्य ताकत का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
इस पूरी स्थिति के प्रमुख पहलू निम्नलिखित हैं:
1. हवाई हमलों में आम नागरिकों की मौत और असत्यापित दावे
रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) के हवाले से पुष्टि की गई है कि सितंबर महीने में कुनार प्रांत में हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों में एक पुरुष, एक महिला और एक बच्ची की मौत हो गई।
इस्लामाबाद की ओर से हमेशा यह दावा किया जाता है कि ये हमले आतंकवादी ठिकानों (विशेषकर टीटीपी लड़ाकों) को निशाना बनाकर किए गए थे।
हालांकि, रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि पाकिस्तानी सेना द्वारा मारे गए लोगों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं होती, जबकि मारे गए आम नागरिकों के नाम, उनके परिवार और घटनास्थल के पुख्ता दस्तावेज हमेशा सामने आते रहे हैं। सीमावर्ती प्रांतों के अलावा काबुल स्थित ओमेद नशा पुनर्वास केंद्र पर हुए हमले भी इसी कड़ी का हिस्सा रहे हैं।
2. “रणनीतिक गहराई” के सिद्धांत का ध्वस्त होना
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह रुख इस बात का प्रमाण है कि उसका पुराना “रणनीतिक गहराई” (Strategic Depth) का सिद्धांत पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। जिस तालिबान की जीत का कभी पाकिस्तान ने जश्न मनाया था, आज वह उसी सरकार को अस्थिर करने और उसे दंडित करने के रास्ते तलाश रहा है, क्योंकि काबुल अब इस्लामाबाद की हर बात मानने से इनकार कर रहा है।
3. घरेलू मोर्चे पर सेना की विफलता और राजनीतिक संघर्ष
पाकिस्तान के भीतर खैबर पख्तूनख्वा में लगातार बढ़ रही हिंसा और उग्रवाद ने सेना के उस दावे की पोल खोल दी है, जिसमें वह देश की सुरक्षा का एकमात्र ठेकेदार होने का दावा करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी जनरलों के लिए यह दो मोर्चों की लड़ाई बन चुकी है—एक तरफ वे अफगानिस्तान में अपनी मर्जी न चलने पर हवाई हमले कर रहे हैं, और दूसरी तरफ घरेलू मोर्चे पर टीटीपी पर नियंत्रण पाने में अपनी विफलता को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।
हवाई हमलों के जरिए पाकिस्तानी सेना एक तरफ अफगान सरकार को सबक सिखाने की कोशिश करती है, तो दूसरी तरफ अपनी जनता के सामने खुद को मजबूत साबित करने का प्रयास करती है।
