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विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग: फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर सरकार की नजर

विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग: फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर सरकार की नजर

​विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी संघर्ष और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) तथा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर सवार भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।

​इस ब्रीफिंग और रिपोर्ट से जुड़े मुख्य बिंदु:

​जहाजों और नाविकों की वर्तमान स्थिति:

​विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि वर्तमान में होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में 12 वाणिज्यिक जहाजों (6 भारत-ध्वज वाले और 6 भारत के लिए माल लाने वाले विदेशी-ध्वज वाले जहाज) पर कुल 163 भारतीय नाविक सवार हैं।

​इसके अलावा, इस क्षेत्र में विभिन्न वाणिज्यिक जहाजों पर 4,500 से अधिक भारतीय नाविक कार्यरत हैं। जहाजरानी मंत्रालय लगातार इनकी आवाजाही पर नजर रखे हुए है और भारतीय दूतावासों के जरिए नाविकों की सुरक्षा व कल्याण के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं।

​अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर हमलों की कड़ी निंदा:

​भारत ने पश्चिम एशिया संघर्ष की शुरुआत से ही नाविकों को निशाना बनाने वाले हमलों और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर सुरक्षित नेविगेशन में आ रही बाधाओं की कड़ी निंदा की है। भारत ने क्षेत्र में शांति और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की वकालत की है।

​एस. जयशंकर द्वारा ‘जीओएफ ऑन एस4’ की बैठक में उठाया गया मुद्दा:

​गत 25 सितंबर को न्यूयॉर्क में ‘शिपिंग और नाविकों की सुरक्षा और संरक्षा पर मित्र समूह’ (GoF on S4) की उद्घाटन बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच पर भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।

​उन्होंने ओमान की खाड़ी में एमवी सीएपीई डीएओ, पनामा के तेल टैंकर ईएल गािया, और काला सागर (Black Sea) में एमवी ओमोरएफआई व एमवी गोल्डन लीयो पर हुए हमलों का हवाला देते हुए बताया था कि इन घटनाओं में कई भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है या वे लापता हुए हैं।

​अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होने का आह्वान:

​भारत ने वैश्विक समुदाय से आग्रह किया है कि वह काला सागर से लेकर लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र तक नागरिक व वाणिज्यिक जहाजों पर बढ़ रहे हमलों के खतरनाक रुझान के खिलाफ एकजुट होकर ठोस कदम उठाए।

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