राजनीति

चुनाव आयोग पर घमासान: स्मृति ईरानी का कांग्रेस पर तीखा हमला, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर छिड़ी बहस

चुनाव आयोग पर घमासान: स्मृति ईरानी का कांग्रेस पर तीखा हमला, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर छिड़ी बहस

​भारतीय चुनाव आयोग और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच सियासी टकराव और तेज हो गया है। भाजपा नेत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा और उस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया।

​स्मृति ईरानी के बयानों और इस पूरे राजनीतिक विवाद के मुख्य बिंदु:

​चुनाव आयोग पर हमले को लेकर कांग्रेस पर निशाना:

​स्मृति ईरानी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जनता का भरोसा खो चुकी है, इसलिए वह बौखलाहट में चुनाव आयोग (ECI) जैसी स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि भारत का चुनाव आयोग हमारे लोकतंत्र का गौरव है, जिसकी सराहना पूरी दुनिया करती है।

​मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया का समर्थन:

​मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस को घेरते हुए उन्होंने पूछा कि यदि इलेक्टोरल रोल (Electoral Roll) में किसी का नाम गलत है या कोई व्यक्ति मृत है, तो कांग्रेस क्यों चाहती है कि ऐसे नाम मतदाता सूची में बने रहें?

​उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर दस्तावेजों की पुष्टि कर रहे हैं और इस संबंध में पूरी जानकारी सार्वजनिक की जा चुकी है।

​कांग्रेस के इतिहास पर तंज:

​स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पार्टी की स्थापना ब्रिटिश शासनकाल में ब्रिटिश साम्राज्य के संरक्षण के लिए (ए.ओ. ह्यूम द्वारा) हुई थी, आज वही पार्टी भारत के निष्पक्ष चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर रही है।

​संविधान और राजनीतिक आरोप:

​उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस साल 2019 से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश की संवैधानिक व्यवस्थाओं के खिलाफ लगातार हमले कर रही है और संविधान को तार-तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

​यह बयानबाजी ऐसे समय में तेज हुई है जब हाल ही में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन और संसद में मुखर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *