बदरीनाथ में शंख विवाद पर महेंद्र भट्ट ने किया सतपाल महाराज का बचाव, बोले- अध्यात्म का विषय
बदरीनाथ में शंख विवाद पर महेंद्र भट्ट ने किया सतपाल महाराज का बचाव, बोले- अध्यात्म का विषय
बदरीनाथ धाम में देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान संगीत और डीजे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब शंख बजाने की परंपरा तक पहुंच गया है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के शंख को लेकर दिए बयान पर सवाल उठने के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उनका बचाव किया है।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि सतपाल महाराज धर्म के जानकार हैं और उन्होंने जो भी बात कही होगी, अपने अध्ययन के आधार पर कही होगी। उन्होंने कहा कि यह विषय अध्यात्म से जुड़ा है और इस पर किसी राजनीतिक व्यक्ति की ओर से धार्मिक व्याख्या करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक इस विषय को अध्यात्म से जुड़े लोगों पर ही छोड़ना चाहिए।
महाराज ने संगीत पर उठे सवालों को किया खारिज
सतपाल महाराज ने बदरीनाथ धाम में संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर रोक होने की बात को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ में संगीत कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कपाट खुलने और बंद होने के दौरान सेना के बैंड की प्रस्तुतियों का उदाहरण देते हुए कहा कि धाम में संगीत की परंपरा रही है।
शंख को लेकर महाराज ने कहा कि बदरीनाथ मंदिर के अंदर पूजा के दौरान शंख बजाने की परंपरा नहीं है, जबकि मंदिर के बाहर शंख बजाने पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने भगवान कृष्ण के पाञ्चजन्य शंख और भगवान विष्णु के हाथ में मौजूद शंख का भी उल्लेख किया।
शंख को लेकर बयान पर विवाद
सतपाल महाराज के मुताबिक बदरीनाथ मंदिर के भीतर शंख का इस्तेमाल नहीं किया जाता क्योंकि एक मान्यता के अनुसार शंख को हड्डी से बना माना जाता है और मंदिर के अंदर हड्डी का इस्तेमाल वर्जित है। इस बयान के बाद धार्मिक संगठनों और तीर्थ पुरोहितों की ओर से आपत्ति जताई गई है।
इससे पहले बदरीनाथ में आयोजित देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव में तेज संगीत और डीजे को लेकर भी धार्मिक परंपराओं और कार्यक्रम के स्वरूप पर सवाल उठे थे। 19 और 20 सितंबर को आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन की ओर से सेना की गढ़वाल स्काउट्स बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर को नोटिस भी जारी किया गया था।
शंख की धार्मिक परंपरा और उसके स्वरूप को लेकर अलग-अलग धार्मिक व्याख्याएं सामने आ रही हैं। ऐसे में विवाद अब बदरीनाथ धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ वहां की धार्मिक परंपराओं की व्याख्या तक पहुंच गया है।
