भारत समेत आठ देशों और यूरोपीय संघ ने शुरू की ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म’ (P4M) पहल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की सह-अध्यक्षता
भारत समेत आठ देशों और यूरोपीय संघ ने शुरू की ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म’ (P4M) पहल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की सह-अध्यक्षता
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान भारत समेत आठ देशों और यूरोपीय संघ (EU) ने मिलकर ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म’ (P4M) नामक एक नई वैश्विक पहल की शुरुआत की है। न्यूयॉर्क में आयोजित इस पहले P4M शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की।
पहल के सह-प्रायोजक और मुख्य उद्देश्य
संस्थापक सदस्य: इस पहल के शुरुआती सह-प्रायोजकों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा, केन्या और यूरोपीय संघ शामिल हैं।
मुख्य उद्देश्य: इस पहल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न महाद्वीपों और क्षेत्रों के देशों को एक मंच पर लाना, बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करना, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान सुनिश्चित करना तथा वैश्विक स्तर पर शांति और समावेशी समृद्धि को बढ़ावा देना है।
संयुक्त घोषणा और वैश्विक चिंताएं
सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त घोषणा पत्र में मौजूदा वैश्विक हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई:
दुनिया में बढ़ते ध्रुवीकरण, संघर्षों के विस्तार, अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों, संरक्षणवाद, दबाव की राजनीति और बल प्रयोग की धमकियों को वैश्विक शांति के लिए खतरा बताया गया।
यह रेखांकित किया गया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था आज की जटिल और बहुध्रुवीय दुनिया के अनुकूल होनी चाहिए, जिसके लिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार जरूरी है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के प्रमुख बिंदु
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातों पर जोर दिया:
बहुपक्षवाद की भूमिका: उन्होंने कहा कि आज की दबावपूर्ण वैश्विक व्यवस्था में बहुपक्षवाद को अपनी भूमिका और अधिक मजबूत करनी होगी तथा निर्णय प्रक्रिया को पारदर्शी और सहभागी बनाना होगा।
प्रमुख चुनौतियां: जयशंकर ने वैश्विक स्तर पर ईंधन, खाद्य, उर्वरक और वित्त से जुड़ी चुनौतियों का विशेष रूप से उल्लेख किया।
तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला: उभरती प्रौद्योगिकियों के जोखिमों से निपटने के लिए नए सुरक्षा ढांचे बनाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने पर जोर दिया ताकि किसी एक क्षेत्र के व्यवधान से पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित न हो।
अन्य प्रमुख बिंदु और भविष्य की रूपरेखा
कानून और संप्रभुता का सम्मान: घोषणा में संप्रभु समानता, क्षेत्रीय अखंडता, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकारों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दोहराई गई।
वैश्विक मुद्दे: इसमें जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल बदलाव, वैश्विक स्वास्थ्य और विकास वित्त जैसे मुद्दों पर व्यापक सहयोग की बात कही गई।
एंटोनियो कोस्टा का बयान: यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि आज की चुनौतियों का सामना कोई भी देश अकेले नहीं कर सकता, और P4M पहल साझा सिद्धांतों को ठोस कार्रवाई में बदलने का काम करेगी।
यह पहल ऐसे समय में शुरू की गई है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में वैश्विक शांति, आर्थिक स्थिरता, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े मुद्दों पर सबसे अधिक जोर दिया जा रहा है।
