Thursday, September 10, 2026
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मक्का संयुक्त रक्षा समझौता: पाकिस्तान ने कहा— हूती विद्रोहियों के खिलाफ फिलहाल नहीं होगी कोई सैन्य कार्रवाई

मक्का संयुक्त रक्षा समझौता: पाकिस्तान ने कहा— हूती विद्रोहियों के खिलाफ फिलहाल नहीं होगी कोई सैन्य कार्रवाई

​इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि सऊदी अरब और तुर्की के साथ हस्ताक्षरित ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ (Mecca Joint Defense Pact) के तहत यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ फिलहाल कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी। विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह समझौता एक व्यापक रक्षात्मक ढांचा है, न कि किसी तत्काल सैन्य अभियान का आदेश।

​1. मक्का समझौता रक्षात्मक प्रकृति का, तत्काल हस्तक्षेप नहीं

​सैन्य कार्रवाई पर चर्चा नहीं: पाकिस्तान विदेश कार्यालय के अनुसार, समझौते के तहत हूतियों के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई को लेकर फिलहाल कोई वार्ता नहीं चल रही है। सऊदी अरब के साथ पुराने रक्षा समझौतों के तहत पाकिस्तानी सेना प्रशिक्षण और रसद सहायता के लिए वहां पहले से मौजूद है।

​सामूहिक सुरक्षा का सिद्धांत: प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यद्यपि यह समझौता रक्षात्मक प्रकृति का है और तीनों में से किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा, फिर भी इसका अर्थ सऊदी अरब से जुड़े हर सुरक्षा संकट में तत्काल पाकिस्तानी सैन्य हस्तक्षेप नहीं है।

​2. सऊदी ऊर्जा सुविधाओं पर हूती हमलों के बीच आया बयान

​ऊर्जा ढांचों पर हमला: यह बयान सऊदी अरब के दक्षिणी क्षेत्रों में स्थित ऊर्जा सुविधाओं पर यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद आया है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में 73 लोग घायल हुए और ऊर्जा कामकाज प्रभावित हुआ।

​तनाव की वजह: जुलाई में हूती-नियंत्रित सना हवाई अड्डे पर हुए हमलों के बाद दोनों पक्षों के बीच संघर्ष फिर भड़क उठा था, जिसके जवाब में हूतियों ने सऊदी अरब के आभा हवाई अड्डे और अन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

​3. ईरान से हस्तक्षेप की अपील

​कूटनीतिक प्रयास: पाकिस्तान ने ईरान से आग्रह किया है कि वह हूती विद्रोहियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे ताकि सऊदी अरब पर होने वाले हमलों को रोका जा सके।

​गठबंधन का विस्तार नहीं: विदेश कार्यालय ने साफ किया कि मक्का समझौता एक सीमित और रक्षात्मक गठबंधन है, और फिलहाल इसमें किसी अन्य देश को शामिल करने या इसका दायरा बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।

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