Wednesday, September 9, 2026
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मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या से जुड़े मिथक: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (UP) की पहल; जानिए मिथक, उनकी सच्चाई और हेल्पलाइन नंबर

मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या से जुड़े मिथक: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (UP) की पहल; जानिए मिथक, उनकी सच्चाई और हेल्पलाइन नंबर

​लखनऊ: शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही मानसिक स्वास्थ्य भी जीवन का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन आत्महत्या जैसे संवेदनशील विषय पर समाज में व्याप्त हिचकिचाहट और भ्रम के कारण अक्सर लोग चुप्पी साध लेते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), उत्तर प्रदेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) के माध्यम से जागरूकता बढ़ाते हुए आत्महत्या से जुड़े प्रमुख मिथकों को तोड़ने और संवेदनशील संवाद स्थापित करने का संदेश दिया है।

​1. आत्महत्या से जुड़े 5 बड़े मिथक और उनकी वास्तविक सच्चाई

​मिथक 1: जो लोग आत्महत्या की बात करते हैं, वे वास्तव में ऐसा नहीं करते।

​सच्चाई: गहरे मानसिक या भावनात्मक दर्द से गुजर रहे लोग सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से अपने विचार व्यक्त करते हैं। किसी भी संकेत को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

​मिथक 2: आत्महत्या के बारे में पूछने से व्यक्ति के मन में ऐसा विचार आ सकता है।

​सच्चाई: ऐसा नहीं है। संवेदनशीलता और बिना किसी पूर्वाग्रह (Non-judgmental) के सीधी बात करने से पीड़ित व्यक्ति को अपना दर्द साझा करने और खुलकर बात करने का मौका मिलता है।

​मिथक 3: आत्महत्या का विचार करने वाला व्यक्ति पूरी तरह मन बना चुका होता है।

​सच्चाई: पीड़ित व्यक्ति वास्तव में मरना नहीं चाहता, बल्कि वह अपने असहनीय भावनात्मक दर्द से राहत चाहता है। उनके मन में दुविधा होती है; ऐसे में सही समय पर मदद और हस्तक्षेप (Intervention) जीवन बचा सकता है।

​मिथक 4: आत्महत्या हमेशा बिना किसी पूर्व चेतावनी के होती है।

​सच्चाई: अधिकतर मामलों में व्यक्ति पहले से चेतावनी भरे संकेत देता है—जैसे अत्यधिक निराशा, लोगों से दूरी बनाना, चिड़चिड़ापन, व्यवहार में अचानक बदलाव या मौत से जुड़ी बातें करना।

​मिथक 5: केवल गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित लोग ही आत्महत्या करते हैं।

​सच्चाई: मानसिक विकार एक बड़ा कारण हो सकते हैं, लेकिन आत्महत्या के पीछे मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, जैविक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कई जटिल कारणों का समावेश हो सकता है।

​2. कैसे करें मदद और विशेषज्ञ सहायता

​बिना जज किए सुनें: परेशान इंसान को तुरंत समाधान देने से पहले एक ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता होती है जो उसकी बात को बिना किसी राय या निर्णय के ध्यानपूर्वक सुने।

​पेशेवर मदद के लिए प्रेरित करें: व्यक्ति की परेशानी को छोटा न समझें और आवश्यकता महसूस होने पर तुरंत विशेषज्ञ (Counselor/Psychiatrist) की सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित करें।

​3. मानसिक स्वास्थ्य सहायता हेल्पलाइन नंबर

​टोल-फ्री नंबर: मानसिक तनाव या सहायता के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के टेली-मानस (Tele-MANAS) टोल-फ्री नंबर 14416 पर संपर्क किया जा सकता है।

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