Wednesday, September 9, 2026
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गणेश चतुर्थी 2026: रॉक फोर्ट पहाड़ी पर स्थित तिरुचिरापल्ली का ‘उच्ची पिल्लयार मंदिर’; जानिए 437 सीढ़ियों और विभीषण से जुड़ी पौराणिक कथा का महत्व

गणेश चतुर्थी 2026: रॉक फोर्ट पहाड़ी पर स्थित तिरुचिरापल्ली का ‘उच्ची पिल्लयार मंदिर’; जानिए 437 सीढ़ियों और विभीषण से जुड़ी पौराणिक कथा का महत्व

​तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु): इस वर्ष 14 सितंबर से शुरू हो रहे 10 दिवसीय गणेश उत्सव के पावन अवसर पर यदि आप किसी अनूठे और ऐतिहासिक गणपति मंदिर के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली (त्रिचि) स्थित ‘उच्ची पिल्लयार मंदिर’ एक उत्कृष्ट स्थल है। विशाल ‘रॉक फोर्ट’ (Rock Fort) पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी भौगोलिक बनावट, मनोरम प्राकृतिक दृश्यों और रामायण काल से जुड़े पौराणिक इतिहास के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।

​1. 437 सीढ़ियाँ और रॉक फोर्ट पहाड़ी का विहंगम दृश्य

​अनोखी भौगोलिक स्थिति: सामान्य समतल भूमि पर बने मंदिरों से अलग, यह ऐतिहासिक मंदिर एक विशाल चट्टानी पहाड़ी के शीर्ष पर बना हुआ है।

​437 सीढ़ियों की चढ़ाई: श्रद्धालुओं को मंदिर के मुख्य गर्भगृह तक पहुँचने के लिए पहाड़ी को काटकर बनाई गई लगभग 437 सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है।

​शहर का विहंगम नजारा: पहाड़ी की चोटी पर पहुँचने के बाद श्रद्धालुओं को त्रिचि शहर, पवित्र कावेरी नदी, श्रीरंगम द्वीप और ऐतिहासिक रॉक फोर्ट ब्रिज का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है।

​2. रामायण काल से जुड़ा पौराणिक इतिहास (विभीषण और बाल गणेश की कथा)

​श्रीरंगनाथ की प्रतिमा: मान्यता के अनुसार, लंकाधिपति रावण के वध के बाद भगवान श्रीराम ने विभिषण को भगवान विष्णु (रंगनाथ) की प्रतिमा भेंट की थी। शर्त यह थी कि यह प्रतिमा रास्ते में जहाँ भी ज़मीन पर रखी जाएगी, वहीं स्थापित हो जाएगी।

​बालक रूप में पधारे गणेश: लंका लौटते समय त्रिचि में कावेरी नदी के तट पर स्नान के दौरान विभीषण ने प्रतिमा एक बालक को सौंपी, जो स्वयं भगवान गणेश थे।

​पहाड़ी पर प्रकटीकरण: बाल रूपी गणेश ने प्रतिमा को ज़मीन पर रख दिया (जहाँ आज प्रसिद्ध श्रीरंगम मंदिर स्थित है)। क्रोधित विभीषण ने जब बालक का पीछा किया, तो बालक दौड़कर रॉक फोर्ट पहाड़ी की चोटी पर बैठ गया। विभीषण द्वारा सिर पर प्रहार करने के बाद भगवान गणेश ने अपने वास्तविक रूप के दर्शन दिए और विभीषण को आशीर्वाद दिया। तभी से वे यहाँ ‘उच्ची पिल्लयार’ के रूप में विराजमान हैं।

​3. गणेश चतुर्थी पर विशेष आयोजन और उत्सव

​भव्य सजावट व शोभायात्रा: 14 सितंबर से शुरू होने वाले गणेशोत्सव के दौरान पूरे मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया जाता है।

​भक्तों का सैलाब: 10 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना और भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें भाग लेने देश-विदेश से हज़ारों श्रद्धालु पहुँचते हैं।

​4. मंदिर कैसे पहुँचें?

​रेल मार्ग: त्रिचि जंक्शन (Trichy Junction) रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी मात्र 3 किलोमीटर है।

​सड़क मार्ग: त्रिचि सेंट्रल बस स्टैंड से मंदिर लगभग 4 किलोमीटर दूर है।

​वायु मार्ग: तिरुचिरापल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (TRZ) मंदिर से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

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