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ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला: विदेशी छात्रों और पत्रकारों के लिए ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ खत्म, अधिकतम 4 साल का मिलेगा वीजा

ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला: विदेशी छात्रों और पत्रकारों के लिए ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ खत्म, अधिकतम 4 साल का मिलेगा वीजा

​वाशिंगटन: अमेरिकी आव्रजन नीति (Immigration Policy) को और अधिक सख्त बनाते हुए ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए एक नया और कड़ा नियम जारी किया है। इस ऐतिहासिक बदलाव के तहत पिछले करीब 50 सालों से चली आ रही ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ (Duration of Status) व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब अमेरिका में स्टूडेंट वीजा (F-1) और एक्सचेंज विजिटर वीजा (J-1) पर आने वाले विदेशी नागरिकों को अधिकतम 4 साल तक के लिए ही रहने की अनुमति दी जाएगी।

​अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) का दावा है कि इस सख्त नीति का उद्देश्य इमिग्रेशन सिस्टम की विश्वसनीयता बहाल करना, वीजा के गलत इस्तेमाल (Visa Abuse) को रोकना और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।

​विदेशी पत्रकारों और चीनी नागरिकों के लिए भी कड़े नियम

​नए नियमों का दायरा केवल छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों (I-Visa) पर भी इसे सख्ती से लागू किया गया है:

​विदेशी पत्रकार: अब अमेरिका में विदेशी पत्रकारों के रहने की अवधि को केवल 240 दिन (लगभग 8 महीने) तक सीमित कर दिया गया है। हालांकि, वे इतनी ही अवधि के लिए वीजा विस्तार (Extension) की अर्जी दे सकेंगे।

​चीनी नागरिक: चीनी मीडिया कर्मियों को केवल 90 दिनों की अनुमति मिलेगी, जिसे वे अधिकतम 90 दिन और बढ़ाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।

​DHS सचिव मार्कवेन मुलिन ने बताया क्यों जरूरी था बदलाव

​अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के सचिव मार्कवेन मुलिन ने इस फैसले का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा:

​”साल 1978 से चली आ रही पुरानी ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ व्यवस्था के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा कमजोर हो रही थी और इमिग्रेशन में धोखाधड़ी की गुंजाइश बनी हुई थी। दशकों से विदेशी छात्र बिना किसी निश्चित समय सीमा के अमेरिका में रह रहे थे। कई छात्र सिर्फ अमेरिका में टिके रहने के लिए बार-बार नए-नए कोर्स में दाखिला लेते थे और ‘फॉरेवर स्टूडेंट्स’ बन जाते थे। अब समय सीमा तय होने से सरकार उनकी बेहतर ढंग से नियमित जांच और निगरानी (Vetting) कर सकेगी.”

 

​पहले वीजा बढ़ाने की प्रक्रिया में संबंधित शैक्षणिक संस्थानों (कॉलेज-यूनिवर्सिटी) की बड़ी भूमिका होती थी, लेकिन अब किसी भी प्रकार के एक्सटेंशन का अंतिम फैसला सीधे अमेरिकी सरकार के हाथ में होगा।

​समय बढ़ाने के लिए कराना होगा कड़ा बैकग्राउंड चेक

​अगर किसी छात्र या शोधकर्ता को अपनी पढ़ाई या प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए 4 साल से अधिक का समय चाहिए, तो उसे सीधे अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सेवा (USCIS) के पास विस्तार के लिए आवेदन करना होगा। इस प्रक्रिया के दौरान छात्र की कड़ी बायोमेट्रिक जांच, गहन बैकग्राउंड चेक और किसी भी संभावित धोखाधड़ी की जांच की जाएगी।

​इसके साथ ही, नए नियमों के तहत F-1 वीजा धारक छात्रों को कोर्स पूरा होने, कॉलेज बदलने या वीजा स्टेटस बदलने के बाद देश छोड़ने के लिए मिलने वाले समय (Grace Period) को 60 दिन से घटाकर केवल 30 दिन कर दिया गया है। अकादमिक लचीलेपन पर भी रोक लगाई गई है, जिसके तहत छात्र अब एक ही स्तर या उससे निचले स्तर का दूसरा कोर्स (जैसे एक मास्टर डिग्री के बाद दूसरी मास्टर डिग्री) नहीं कर सकेंगे; उन्हें हमेशा उच्च स्तर (जैसे मास्टर के बाद पीएचडी) पर ही जाना होगा।

​पहले से रह रहे छात्र भी आएंगे दायरे में

​यह नियम जल्द ही फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया जाएगा और प्रकाशन के 60 दिनों के बाद पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगा। जो विदेशी छात्र या वीजा धारक वर्तमान में पहले से ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ के तहत अमेरिका में रह रहे हैं, वे भी इस नए नियम के दायरे में आ जाएंगे। नियम लागू होने की तारीख से उनका अधिकतम प्रवास भी 4 वर्षों के लिए ही सीमित (Capped) कर दिया जाएगा।

​भारतीय छात्रों पर पड़ेगा सबसे बड़ा असर

​ट्रंप प्रशासन की इस बेहद सख्त आव्रजन नीति का सीधा और बड़ा असर भारतीय छात्रों पर पड़ने वाला है, क्योंकि अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की ही है। नए नियमों के लागू होने के बाद, उच्च शिक्षा या शोध (जैसे पीएचडी या मेडिकल की लंबी पढ़ाई) के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों को वीजा बढ़ाने के लिए जटिल सरकारी प्रक्रियाओं, भारी फीस और अनिश्चितता के दौर से गुजरना होगा, क्योंकि हर एक्सटेंशन के लिए अब सीधे USCIS की मंजूरी अनिवार्य होगी।

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