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‘जीनवेदा’ की शुरुआत: जेनेटिक्स के जरिए परिवारों को बीमारियों से बचाने की अनूठी पहल

‘जीनवेदा’ की शुरुआत: जेनेटिक्स के जरिए परिवारों को बीमारियों से बचाने की अनूठी पहल

​जयपुर: अक्सर लोग ‘जेनेटिक्स’ (आनुवंशिकी) को एक जटिल वैज्ञानिक विषय मानकर छोड़ देते हैं, लेकिन यह हमारे दैनिक स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसी आधुनिक विज्ञान को आम परिवारों के लिए सरल और सुलभ बनाने के उद्देश्य से जयपुर में ‘जीनवेदा’ की शुरुआत की गई है। इसकी संस्थापक डॉ. अदिति माथुर (पीएचडी, जेनेटिक्स) हैं, जिन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो (स्कॉटलैंड) से मेडिकल जेनेटिक्स में एमएससी और यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। विदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के कायाकल्प को देखने के बाद, वे अपने गृह राज्य राजस्थान के परिवारों को इसका लाभ देने के सपने के साथ वापस लौटीं।

​जीनवेदा का मुख्य उद्देश्य एक ही स्थान पर विश्वसनीय जेनेटिक परीक्षण और संवेदनशील जेनेटिक काउंसेलिंग उपलब्ध कराना है।

​इन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में मार्गदर्शक है ‘जीनवेदा’

​आज के समय में कई ऐसे परिवार हैं जो वर्षों से अपनी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के सटीक कारणों से अनजान हैं। जीनवेदा ऐसे मामलों में एक अहम भूमिका निभा रहा है:

​बच्चों में विकासात्मक देरी: शारीरिक या मानसिक विकास में होने वाली अप्रत्याशित देरी के सटीक कारणों की पहचान करना।

​बार-बार गर्भपात: बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार गर्भपात का सामना कर रहे दंपत्तियों की मदद करना।

​वंशानुगत बीमारियां: पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाले गंभीर रोगों, जैसे—बीटा-थैलेसीमिया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (मांसपेशियों की कमजोरी) या कैंसर के पारिवारिक इतिहास वाले लोगों को सही दिशा दिखाना।

​जेनेटिक रिपोर्ट से ज्यादा जरूरी है ‘काउंसेलिंग’

​जीनवेदा की सबसे बड़ी विशेषता और इसकी आधारशिला यहाँ की ‘जेनेटिक काउंसेलिंग’ प्रक्रिया है। डॉ. अदिति माथुर के अनुसार, केवल जेनेटिक टेस्ट करवा लेना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण यह समझना है कि उस रिपोर्ट का मरीज और उसके परिवार के भविष्य के लिए वास्तविक अर्थ क्या है। यहाँ जटिल वैज्ञानिक रिपोर्ट को बेहद सरल भाषा में समझाया जाता है ताकि परिवार सही चिकित्सकीय निर्णय ले सकें।

​जागरूकता की कमी को दूर करने का प्रयास

​समाज में आज भी यह गलत धारणा है कि आनुवंशिक बीमारियों को रोका नहीं जा सकता। जबकि वैज्ञानिक सच्चाई यह है कि अपने आनुवंशिक जोखिमों को समय रहते समझकर भविष्य की अनेक गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है। यह विज्ञान परिवार नियोजन की सोच रहे जोड़ों, गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और अस्पष्ट बीमारियों से जूझ रहे वयस्कों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।

​जीनवेदा का संदेश: “हमारे जीन्स (Genes) हमारी बीती हुई कहानी जरूर बयां करते हैं, लेकिन वे हमारा भविष्य तय नहीं करते। सही जानकारी, समय पर जांच और उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन के साथ हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के जीवन को भी सुरक्षित और सेहतमंद बना सकते हैं।”

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