Sunday, July 12, 2026
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अंतरिक्ष में गूंजेगा भारत का नाम: केरल के पलक्कड़ की ‘त्रिमूर्ति’ ने रचा इतिहास, नासा मिशन पर रवाना होंगे डॉ. अनिल मेनन

अंतरिक्ष में गूंजेगा भारत का नाम: केरल के पलक्कड़ की ‘त्रिमूर्ति’ ने रचा इतिहास, नासा मिशन पर रवाना होंगे डॉ. अनिल मेनन

​नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: अंतरिक्ष अभियानों की दुनिया में जब भी महाशक्तियों का नाम आता है, तो अमेरिका, रूस और चीन की तस्वीरें सामने उभरती हैं। लेकिन अब इस फेहरिस्त में भारत का डंका भी पूरी दुनिया में बज रहा है। इस गौरवशाली सफर में दक्षिण भारतीय राज्य केरल, और विशेष रूप से वहाँ का पलक्कड़ जिला, एक अनोखा इतिहास रचकर वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है। पलक्कड़ की धरती से एक या दो नहीं, बल्कि तीन-तीन ऐसे जांबाज अंतरिक्ष यात्रियों का कनेक्शन है जो दुनिया के सबसे बड़े स्पेस मिशनों का नेतृत्व कर रहे हैं।

​यह ऐतिहासिक गौरव तब और भी खास हो गया है जब भारतीय मूल के नासा (NASA) अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन 14 जुलाई को रूस के सोयुज MS-29 (Soyuz MS-29) अंतरिक्ष यान से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए अपनी उड़ान भरने जा रहे हैं।

​1. डॉ. अनिल मेनन और एना मेनन: दुनिया की ‘कम्पलीट एस्ट्रोनॉट फैमिली’

​डॉ. अनिल मेनन का संबंध केरल के पलक्कड़ जिले से है। हालांकि उनका जन्म अमेरिका में हुआ, लेकिन उनके पिता भारतीय और मां यूक्रेन की हैं, जिससे उनकी जड़ें पलक्कड़ की माटी से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

​अनिल मेनन बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं:

​वह एक अंतरिक्ष यात्री होने के साथ-साथ डॉक्टर, मैकेनिकल इंजीनियर, स्पेस मेडिसिन स्पेशलिस्ट और अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल भी हैं।

​अंतरिक्ष यात्री चुने जाने से पहले, उन्होंने नासा में एक फ्लाइट सर्जन के तौर पर कई अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत की देखभाल की थी।

​दिलचस्प बात यह है कि उनकी पत्नी एना मेनन भी एक प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री हैं, जिन्होंने सितंबर 2024 में ऐतिहासिक ‘पोलारिस डॉन’ (Polaris Dawn) मिशन के तहत उड़ान भरकर दुनिया की पहली प्राइवेट स्पेस वॉक का रिकॉर्ड बनाया था। दो बच्चों के माता-पिता इस जोड़े को आज दुनिया ‘कम्पलीट एस्ट्रोनॉट फैमिली’ के रूप में जानती है। डॉ. अनिल 14 जुलाई को कजाकिस्तान के बैकोनूर कास्मोड्रोम से करीब 8 महीने लंबे मिशन के लिए रवाना होंगे।

​2. गगनयान का चेहरा: प्रशांत बालकृष्णन नायर

​पलक्कड़ की इस ‘त्रिमूर्ति’ के तीसरे सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ प्रशांत बालकृष्णन नायर हैं। प्रशांत भारत के महत्वाकांक्षी ‘गगनयान मिशन’ (Gaganyaan Mission) के लिए चुने गए चार मुख्य अंतरिक्ष यात्रियों में से एक हैं। वह Axiom-4 मिशन से जुड़ी तैयारियों का भी हिस्सा रहे हैं और देश के भावी अंतरिक्ष अभियानों का सबसे बड़ा चेहरा हैं।

​ह्यूस्टन में पक्की हुई दोस्ती:

अमेरिका के ह्यूस्टन में ट्रेनिंग के दौरान प्रशांत नायर और अनिल मेनन के बीच बेहद गहरी दोस्ती हो गई। इस दोस्ती की एक बड़ी वजह दोनों की साझा जड़ें यानी केरल का पलक्कड़ जिला रहा, जिसने सात समंदर पार भी दोनों को एक सूत्र में बांधे रखा।

 

​3. मिशन पर जाने से पहले प्रशांत और लीना का भावुक संदेश

​अपने अजीज दोस्त और भाई अनिल मेनन की इस ऐतिहासिक उड़ान से ठीक पहले प्रशांत नायर और उनकी पत्नी (प्रसिद्ध अभिनेत्री) लीना ने एक बेहद भावुक संदेश भेजा है:

​”मेरे भाई अनिल और प्रिय एना। यह मेरे और लीना के लिए बेहद भावुक पल है। भारत और केरल की इस महान भूमि से आपका जुड़ाव हमेशा याद रखा जाएगा। हम यहाँ से आपके लिए दुआएँ कर रहे हैं। पिछले साल ह्यूस्टन में आपके साथ बिताया समय बेहद शानदार था। इस लॉन्च के साथ आप और एना सच में एक ‘कम्पलीट एस्ट्रोनॉट फैमिली’ बन गए हैं।”

 

​4. अंतरिक्ष में क्या भूमिका निभाएंगे डॉ. अनिल मेनन?

​8 महीने के इस लंबे मिशन के दौरान डॉ. अनिल मेनन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर कई जटिल और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देंगे:

​मानव शरीर पर प्रभाव का अध्ययन: वह अंतरिक्ष के शून्य-गुरुत्वाकर्षण (माइक्रोग्रैविटी) में इंसानी शरीर पर पड़ने वाले असर, विशेष रूप से ब्लड फ्लो (रक्त प्रवाह) और नसों की संरचना का बारीकी से अध्ययन करेंगे।

​भविष्य के मार्स और मून मिशन की तैयारी: वह एक ऐसी अत्याधुनिक तकनीक का परीक्षण करेंगे, जिससे स्पेस स्टेशन के पीने के पानी से ही मरीजों के लिए ‘आईवी फ्लूइड’ (IV Fluid) तैयार किया जा सके। यह तकनीक भविष्य में इंसानों को मंगल और चांद पर भेजने के मिशन में संजीवनी साबित होगी।

​5. भारत के पोलियो उन्मूलन से भी रहा है अनिल का नाता

​डॉ. अनिल मेनन का भारत से रिश्ता सिर्फ कागजी या उनके पूर्वजों तक सीमित नहीं है। अंतरिक्ष यात्री बनने से पहले वह रोटरी स्कॉलर के रूप में भारत आए थे। उन्होंने दिल्ली में रहकर करीब एक साल तक जमीनी स्तर पर भारत के पोलियो उन्मूलन अभियान के लिए काम किया था। अनिल खुद इस जमीनी काम को अपने जीवन का सबसे बड़ा और अनमोल मानवीय अनुभव मानते हैं।

​केरल और देश के लिए गर्व का क्षण

​केरल का अंतरिक्ष विज्ञान से नाता बेहद पुराना और ऐतिहासिक रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की शुरुआत केरल के ही एक छोटे से मछुआरों के गाँव ‘थुम्बा’ से हुई थी। और आज, उसी केरल के अकेले पलक्कड़ जिले ने नासा (NASA), इसरो (ISRO), रोस्कोस्मोस (Roscosmos) और स्पेसएक्स (SpaceX) जैसी दुनिया की सबसे दिग्गज अंतरिक्ष एजेंसियों को अपने तीन होनहार सितारे सौंप दिए हैं। अमेरिका और रूस जैसे बड़े देशों को छोड़ दिया जाए, तो दुनिया का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र होगा जिसने अंतरिक्ष विज्ञान में ऐसा अद्वितीय योगदान दिया हो। इस ऐतिहासिक पल पर आज पूरा केरल और देश जश्न मना रहा है।

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