केदारनाथ मार्ग पर सेल्फी का शौक पड़ा भारी: बर्फ से फिसला यात्री, SDRF ने देवदूत बनकर बचाई जान
केदारनाथ मार्ग पर सेल्फी का शौक पड़ा भारी: बर्फ से फिसला यात्री, SDRF ने देवदूत बनकर बचाई जान
केदारनाथ | ब्यूरो न्यूज़
आस्था की कठिन यात्रा के दौरान एक पल की लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है, इसका उदाहरण रविवार को केदारनाथ यात्रा मार्ग पर देखने को मिला। छोटी लिनचोली क्षेत्र में सेल्फी लेने के चक्कर में एक यात्री गहरी खाई और बर्फ के बीच फिसल गया। हालांकि, SDRF (राज्य आपदा प्रतिवादन बल) की मुस्तैदी ने एक बड़ा हादसा टाल दिया और यात्री को सुरक्षित बचा लिया।
शाम के अंधेरे में चला रेस्क्यू ऑपरेशन
3 मई की शाम करीब 6:50 बजे पुलिस चौकी लिनचोली से SDRF टीम को सूचना मिली कि छोटी लिनचोली के पास कुछ यात्री मुसीबत में फंसे हैं। सूचना मिलते ही मुख्य आरक्षी मोहन सिंह के नेतृत्व में टीम तत्काल रवाना हुई। दुर्गम पहाड़, जमी हुई बर्फ और फिसलन भरे रास्ते की परवाह न करते हुए टीम मौके पर पहुँची।
सेल्फी लेते समय बिगड़ा संतुलन
मौके पर पहुँचने के बाद पता चला कि विदिशा (मध्य प्रदेश) निवासी अनूप रैकवार एक खतरनाक बर्फीले किनारे पर चढ़कर सेल्फी ले रहे थे। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वे असंतुलित होकर नीचे जा गिरे। गिरने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आईं और वे हिलने-डुलने की स्थिति में नहीं थे। उनके साथ आए अन्य यात्री सुरक्षित थे, लेकिन अनूप बुरी तरह फंस गए थे।
SDRF ने इस तरह दी ‘नई जिंदगी’
SDRF जवानों ने बेहद सावधानी से घायल यात्री तक पहुँच बनाई।
प्राथमिक उपचार: टीम ने सबसे पहले मौके पर ही यात्री को प्राथमिक चिकित्सा दी ताकि खून का बहाव रुक सके।
कठिन निकासी: इसके बाद घायल अनूप को स्ट्रेचर पर लिटाकर बर्फीले और पथरीले रास्तों से होते हुए सुरक्षित नीचे लाया गया।
अस्पताल में भर्ती: यात्री को तुरंत छोटी लिनचोली स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है और स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
घायल यात्री का विवरण:
नाम: अनूप रैकवार (42 वर्ष)
निवासी: विदिशा, मध्य प्रदेश
प्रशासन की चेतावनी: “जान है तो जहान है”
इस घटना के बाद पुलिस और मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए सख्त अपील जारी की है:
जोखिम भरे स्थानों से दूर रहें: केदारनाथ मार्ग पर कई जगह जमी बर्फ बेहद फिसलन भरी है, वहाँ सेल्फी लेने की कोशिश न करें।
नियमों का पालन: यात्रा के दौरान केवल निर्धारित रास्तों पर ही चलें और सुरक्षा घेरे को पार न करें।
सतर्कता जरूरी: ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम और रास्ते कभी भी बदल सकते हैं, इसलिए सतर्क रहें।
यात्री ध्यान दें: आपकी सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है, लेकिन आपकी अपनी सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। पहाड़ों पर एक फोटो के लिए अपनी जान जोखिम में डालना समझदारी नहीं है।
