Thursday, September 10, 2026
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​राजनीतिक हलचल: राज्यसभा सांसद संदीप पाठक पर पंजाब में दो गैर-जमानती FIR दर्ज, दिल्ली आवास पर पुलिस की दबिश

​राजनीतिक हलचल: राज्यसभा सांसद संदीप पाठक पर पंजाब में दो गैर-जमानती FIR दर्ज, दिल्ली आवास पर पुलिस की दबिश

​चंडीगढ़/नई दिल्ली | समाचार ब्यूरो: आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व रणनीतिकार और वर्तमान राज्यसभा सांसद संदीप पाठक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पंजाब के दो अलग-अलग जिलों में उनके खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत दो प्राथमिकियाँ (FIR) दर्ज की गई हैं। यह कार्रवाई उनके ‘आप’ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद हुई है, जिससे राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है।

​भ्रष्टाचार और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप

​सूत्रों के मुताबिक, दर्ज की गई FIR में भ्रष्टाचार और यौन शोषण जैसे संगीन आरोप शामिल हैं। पुलिस ने इन मामलों को गैर-जमानती धाराओं के तहत दर्ज किया है, जिसका अर्थ है कि संदीप पाठक पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इन आरोपों का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है।

​दिल्ली आवास पर ‘हाई-वोल्टेज’ ड्रामा

​शनिवार सुबह जैसे ही FIR की खबर फैली, पंजाब पुलिस की एक टीम संदीप पाठक के दिल्ली स्थित सरकारी आवास (C-1/28) पर पहुँची।

​पीछे के रास्ते से निकले: चश्मदीदों और सूत्रों के अनुसार, पुलिस के पहुँचने से ठीक पहले संदीप पाठक अपने सुरक्षा अधिकारी (PSO) के साथ घर के पिछले दरवाजे से निकल गए।

​पुलिस की मुस्तैदी: दिल्ली पुलिस और पंजाब पुलिस के बीच समन्वय की खबरें हैं, और किसी भी समय उनकी गिरफ्तारी संभव मानी जा रही है।

​”देश पार्टी से बड़ा है”: संदीप पाठक की प्रतिक्रिया

​अपने खिलाफ हुई कार्रवाई पर चुप्पी तोड़ते हुए संदीप पाठक ने इसे ‘प्रतिशोध की राजनीति’ करार दिया है। उन्होंने कहा:

​”मुझे ऐसी किसी FIR की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। मैंने हमेशा ईमानदारी से देश की सेवा की है। देश किसी भी पार्टी से बड़ा है और मैं इसे कभी धोखा नहीं दूंगा। अगर मेरे खिलाफ यह कार्रवाई की गई है, तो यह विरोधियों के डर को दर्शाता है।”

​सियासी घमासान: BJP ने बताया ‘बदले की कार्रवाई’

​संदीप पाठक उन 7 राज्यसभा सांसदों में शामिल हैं जिन्होंने हाल ही में AAP छोड़कर BJP का दामन थामा है। इस दलबदल के बाद AAP की राज्यसभा में संख्या घटकर केवल 3 रह गई है।

​भाजपा का पक्ष: पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने इसे ‘पुलिस स्टेट’ की निशानी बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार पुलिस को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।

​अकाली दल का वार: बिक्रम सिंह मजीठिया ने चुटकी लेते हुए कहा कि जो कल तक ‘चाणक्य’ थे, वे आज ‘जीरो’ कैसे हो गए? उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पाठक गलत थे, तो उनके पुराने आकाओं पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

​निष्कर्ष: पंजाब पुलिस की जांच अब तेज हो गई है। आने वाले कुछ घंटे संदीप पाठक के राजनीतिक और कानूनी भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

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