पाकिस्तान में आतंकियों का ‘सफाया’ जारी: हिजबुल कमांडर सज्जाद अहमद की इस्लामाबाद में रहस्यमयी मौत
पाकिस्तान में आतंकियों का ‘सफाया’ जारी: हिजबुल कमांडर सज्जाद अहमद की इस्लामाबाद में रहस्यमयी मौत
इस्लामाबाद | ब्यूरो
पाकिस्तान में भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले आतंकियों के मारे जाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। ताज़ा घटनाक्रम में, आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के टॉप कमांडर सज्जाद अहमद की पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई है। सज्जाद मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले (पट्टन, पलहालन) का रहने वाला था और दशकों से सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को संचालित कर रहा था।
29 साल से पाकिस्तान में था सक्रिय
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, सज्जाद अहमद साल 1997 में हथियारों की ट्रेनिंग लेने के लिए सरहद पार कर पाकिस्तान गया था। तब से वह वापस नहीं लौटा और कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी हमलों और घुसपैठ की साजिशों का मास्टरमाइंड रहा। इस्लामाबाद में उसकी मौत को आतंकी गुटों के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
एक हफ्ते में तीन बड़े आतंकियों का अंत
सज्जाद की मौत महज इत्तेफाक नहीं मानी जा रही है, क्योंकि पिछले एक हफ्ते के भीतर पाकिस्तान की धरती पर कई वांटेड आतंकी मारे गए हैं:
शेख यूसुफ अफरीदी (लश्कर कमांडर): 26 अप्रैल 2026 को खैबर पख्तूनख्वा के लांडी कोटाल इलाके में अज्ञात बंदूकधारियों ने लश्कर-ए-तैयबा के इस टॉप कमांडर को गोलियों से भून दिया।
अबू सखर मकसूद अहमद: लश्कर-ए-तैयबा का एक और खूंखार आतंकी मकसूद अहमद भी बीते दिनों मारा गया। उसका अंतिम संस्कार फैसलाबाद के चक बहमनीवाला इलाके में कड़ी सुरक्षा के बीच किया गया।
बेनकाब हुआ पाकिस्तान का ‘टेरर टेप’
इन आतंकियों की पाकिस्तान के मुख्य शहरों (इस्लामाबाद, फैसलाबाद) में मौजूदगी और वहां उनके अंतिम संस्कार ने एक बार फिर भारत के दावों की पुष्टि कर दी है। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह कहता रहा है कि पाकिस्तान की सरकार और वहां की सेना (ISI) भारत विरोधी आतंकियों को पनाह और सुरक्षा प्रदान करती है। इस्लामाबाद जैसे सुरक्षित शहर में हिजबुल कमांडर की मौत ने पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अज्ञात हमलावरों का खौफ
पाकिस्तान में पिछले कुछ महीनों से ‘अज्ञात हमलावरों’ द्वारा आतंकियों को चुन-चुन कर निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ी हैं। हालांकि पाकिस्तान इन मौतों पर आधिकारिक तौर पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वहां मौजूद आतंकी अब सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
