Year Ender 2025: उत्तराखंड में मौत का साल बना 2025! कहीं सड़क हादसे तो कहीं लैंडस्लाइड का कहर
Year Ender 2025: उत्तराखंड में मौत का साल बना 2025! कहीं सड़क हादसे तो कहीं लैंडस्लाइड का कहर
देहरादून, 31 दिसंबर 2025: साल 2025 उत्तराखंड के लिए प्रकृति के दोहरे प्रकोप का गवाह बना। एक तरफ घुमावदार पहाड़ी सड़कें मौत की वजह बनीं, तो दूसरी तरफ क्लाउडबर्स्ट और लैंडस्लाइड ने गांवों को मलबे में दफन कर दिया। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और पुलिस के आंकड़ों से पता चलता है कि साल भर में सड़क हादसों और प्राकृतिक आपदाओं ने सैकड़ों जिंदगियां छीनीं। जनवरी से सितंबर तक ही 1,600 सड़क दुर्घटनाओं में 917 मौतें दर्ज हुईं, जबकि पूरे साल का अनुमान 1,100 से ज्यादा। वहीं, मॉनसून में लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड्स ने दर्जनों जानें लीं। चारधाम यात्रा के दौरान भी हादसे और लैंडस्लाइड ने यात्रियों को मुश्किल में डाला।
सड़क हादसों का भयावह आंकड़ा
परिवहन विभाग के अनुसार, सितंबर तक 1,369-1,600 हादसे हुए, जिनमें 932-917 मौतें हुईं। साल का सबसे दर्दनाक हादसा 26 जून को रुद्रप्रयाग में हुआ, जहां चारधाम यात्रा पर जा रही मिनी बस अलकनंदा नदी में गिर गई। अल्मोड़ा, चमोली और पिथौरागढ़ में बस-जीप हादसे आम रहे। पहाड़ी जिलों में वाहन खाई में गिरने के मामले ज्यादा घातक साबित हुए। वजहें: संकरी सड़कें, ओवरलोडिंग, तेज रफ्तार और खराब मौसम। चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ ने हादसों को बढ़ावा दिया।
लैंडस्लाइड और क्लाउडबर्स्ट का तांडव
मॉनसून में उत्तराखंड प्रकृति के गुस्से का शिकार बना। अगस्त में उत्तरकाशी के धराली गांव में क्लाउडबर्स्ट से फ्लैश फ्लड और डेब्रिस फ्लो ने दर्जनों घर बहा दिए, 4-70 मौतें और 50+ लापता। जुलाई-अगस्त में चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में कई क्लाउडबर्स्ट, जहां लैंडस्लाइड ने सड़कें ब्लॉक कीं और गांव अलग-थलग कर दिए। कुल मिलाकर, मॉनसून में 130+ मौतें (हिमाचल के साथ तुलना में), जिनमें ज्यादातर लैंडस्लाइड से। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट से पहाड़ कटाई, अनियंत्रित निर्माण और क्लाइमेट चेंज ने स्लोप्स को अस्थिर बनाया।
चारधाम यात्रा पर भी असर
2025 की चारधाम यात्रा रिकॉर्ड तोड़ रही थी, लेकिन बारिश और लैंडस्लाइड ने कई बार रोक लगाई। जून-अगस्त में यात्रा 24 घंटे के लिए सस्पेंड हुई। यात्रा मार्गों पर बस हादसे और लैंडस्लाइड आम। यात्रियों की संख्या लाखों में, लेकिन सेफ्टी मेजर्स कम। विशेषज्ञ कहते हैं, टूरिज्म बूम और इंफ्रा प्रोजेक्ट्स ने जोखिम बढ़ाया।
कारण और चुनौतियां
अनियंत्रित विकास: रोड विडनिंग से स्लोप्स कमजोर।
क्लाइमेट चेंज: अनियमित बारिश, ग्लेशियर मेल्टिंग।
इंफ्रा की कमी: पुरानी सड़कें, बैरियर नहीं।
अवेयरनेस की कमी: ड्राइवर ट्रेनिंग और टूरिस्ट गाइडलाइंस अपर्याप्त।
सोशल एक्टिविस्ट अनूप नौटियाल कहते हैं, “हर साल सैकड़ों मौतें, लेकिन रूट कॉज एनालिसिस नहीं होता।” सरकार ने न्यू रोड सेफ्टी पॉलिसी 2025 लाई, लेकिन लागू होना बाकी।
आगे की राह
विशेषज्ञ सुझाव: ब्लैक स्पॉट्स पर फोकस, अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, इको-फ्रेंडली निर्माण और टूरिज्म कैरिंग कैपेसिटी तय करना। नए साल में उम्मीद है कि उत्तराखंड की खूबसूरती मौत का पर्याय न बने। सुरक्षित सड़कें और मजबूत नीतियां जरूरी हैं, ताकि 2026 बेहतर हो।
