Thursday, March 12, 2026
Latest:
राष्ट्रीय

अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का यू-टर्न: नवंबर फैसले पर लगी रोक, जानिए क्यों बदला स्टैंड और कोर्ट ने क्या कहा

अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का यू-टर्न: नवंबर फैसले पर लगी रोक, जानिए क्यों बदला स्टैंड और कोर्ट ने क्या कहा

नई दिल्ली, 29 दिसंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और खनन से जुड़े अपने ही नवंबर फैसले पर बड़ा यू-टर्न लिया है। 20 नवंबर 2025 के आदेश में कोर्ट ने केंद्र की कमेटी की सिफारिशें स्वीकार करते हुए अरावली हिल्स को ‘लोकल रिलीफ से 100 मीटर या उससे ज्यादा ऊंची भूमि’ के रूप में परिभाषित किया था, जिससे 90% से ज्यादा अरावली क्षेत्र सुरक्षा से बाहर हो जाता। इस फैसले पर देशभर में भारी विरोध हुआ, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और विपक्ष ने इसे ‘अरावली की मौत का वारंट’ करार दिया। अब 28 दिसंबर को वेकेशन बेंच ने इस फैसले को फिलहाल स्थगित कर दिया और खनन-निर्माण पर लगी रोक को अस्थायी रूप से हटा दिया।

क्यों पलटा फैसला?

नवंबर आदेश के बाद सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक प्रदर्शन हुए। #SaveAravalli ट्रेंड किया, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-NCR में विरोध मार्च निकले। कार्यकर्ताओं का कहना था कि 100 मीटर की यह परिभाषा पुरानी पहाड़ियों को नजरअंदाज करती है, जो ग्राउंडवॉटर रिचार्ज, जैव विविधता और रेगिस्तान रोकने में अहम हैं। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की अपनी रिपोर्ट भी इससे अलग थी। कोर्ट ने माना कि फैसले को ‘गलत समझा जा रहा है’ और कुछ स्पष्टीकरण जरूरी हैं। मुख्य वजह: पर्यावरणीय प्रभाव का गहन अध्ययन न होना और कमेटी रिपोर्ट में अस्पष्टताएं।

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की बेंच (जस्टिस जेके माहेश्वरी और एजी मसीह के साथ) ने कहा:

“कमेटी की सिफारिशें और कोर्ट के निष्कर्ष तब तक स्थगित रहेंगे।”

“रिपोर्ट या फैसले को लागू करने से पहले निष्पक्ष, स्वतंत्र प्रक्रिया जरूरी है।”

केंद्र और राज्यों (दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात) को नोटिस जारी, जवाब मांगा।

हाई-लेवल एक्सपर्ट कमेटी बनाने का प्रस्ताव, जो पर्यावरणीय प्रभाव, खनन की जरूरत और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर विचार करे।

अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक है, क्योंकि पुराना फैसला खनन लॉबी को फायदा पहुंचा सकता था। अब तक नई माइनिंग लीज पर रोक थी, लेकिन स्थगन से मौजूदा गतिविधियां जारी रह सकती हैं। पर्यावरण मंत्रालय ने भी कहा कि 90% अरावली सुरक्षित रहेगी। क्या यह स्थगन अंतिम सुरक्षा देगा? जनवरी की सुनवाई पर नजरें टिकी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *