मनरेगा की जगह ‘वीबी जी राम जी’ बिल: नाम के अलावा ये 5 बड़े बदलाव आएंगे, जानिए पूरी डिटेल
मनरेगा की जगह ‘वीबी जी राम जी’ बिल: नाम के अलावा ये 5 बड़े बदलाव आएंगे, जानिए पूरी डिटेल
नई दिल्ली, 15 दिसंबर 2025: केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को पूरी तरह बदलने का फैसला किया है। इसके स्थान पर नया बिल लाया जा रहा है, जिसका पूरा नाम विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025 है। इसे आम बोलचाल में ‘वीबी जी राम जी’ कहा जा रहा है। यह बिल संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा और पास होने पर मनरेगा कानून पूरी तरह निरस्त हो जाएगा।
सरकार का दावा है कि यह नया कानून ‘विकसित भारत 2047’ विजन के अनुरूप है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा। लेकिन विपक्ष इसे महात्मा गांधी का नाम हटाने और राज्यों पर बोझ बढ़ाने की साजिश बता रहा है। नाम बदलने के अलावा नए बिल में ये प्रमुख बदलाव प्रस्तावित हैं:
रोजगार के दिन बढ़ेंगे: मनरेगा में 100 दिन की गारंटी थी, अब हर ग्रामीण परिवार को 125 दिन का अकुशल मजदूरी रोजगार मिलेगा। इससे ग्रामीण आय में स्थिरता आएगी।
फंडिंग पैटर्न बदलेगा: मनरेगा में अकुशल मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र उठाता था। नए बिल में केंद्र-राज्य अनुपात 60:40 होगा, यानी राज्यों पर 40% बोझ आएगा। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों को छूट मिल सकती है।
काम की प्राथमिकताएं नई: मनरेगा में काम बिखरे हुए थे, अब फोकस 4 क्षेत्रों पर – जल सुरक्षा, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका संबंधी इंफ्रा और क्लाइमेट रेसिलिएंस। टिकाऊ एसेट्स बनेंगे।
डिजिटल और पारदर्शिता बढ़ेगी: सभी कामों को ‘विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक’ में मैप किया जाएगा। डिजिटल मॉनिटरिंग, तेज पेमेंट (7-15 दिन में) और सख्त ओवरसाइट होगी।
प्लानिंग और कंडीशंस: डिमांड-ड्रिवन की जगह नॉर्मेटिव फंडिंग, यानी पहले से तय बजट। राज्यों को अपनी कार्ययोजना बनानी होगी।
विपक्ष का कहना है कि इससे राज्यों (खासकर तमिलनाडु-केरल जैसे) पर बोझ बढ़ेगा और गरीबी सूचकांक से फंड आवंटन प्रभावित होगा। सरकार कहती है कि यह आधुनिक और जवाबदेह सिस्टम है। बिल पर संसद में जोरदार बहस की उम्मीद है।
