भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर अहम बातचीत, नवंबर तक पहली ट्रेंच पर सहमति की उम्मीद
भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर अहम बातचीत, नवंबर तक पहली ट्रेंच पर सहमति की उम्मीद
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर मंगलवार (16 सितंबर 2025) को नई दिल्ली में महत्वपूर्ण वार्ता हुई। अमेरिकी दक्षिण एशिया व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की। यह पहली आमने-सामने की बैठक थी, जबसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त में भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। दोनों पक्षों ने समझौते की दिशा में तेजी लाने पर सहमति जताई, खासकर पहली ट्रेंच को नवंबर 2025 तक अंतिम रूप देने पर। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि बातचीत दोनों देशों की संतुष्टि के लिए प्रगति कर रही है।
यह बैठक ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हालिया सकारात्मक संवाद का नतीजा है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा था कि वे मोदी से जल्द बात करेंगे और व्यापार सौदे को सफल बनाने में कोई मुश्किल नहीं आएगी। मोदी ने भी ट्रंप के बयान का स्वागत किया। पांच दौर की वार्ता पहले हो चुकी है, जबकि छठा दौर अगस्त 25-29 के बीच निर्धारित था, लेकिन टैरिफ विवाद के कारण स्थगित हो गया। अब यह बैठक छठे दौर की समयसीमा तय करने और टैरिफ मुद्दे को सुलझाने पर केंद्रित रही। भारतीय मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह द्विपक्षीय व्यापार वार्ता का हिस्सा है, जो रोडमैप तैयार करने पर फोकस करेगी। अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर भारत की नीति पर टैरिफ लगाया था, लेकिन अब दोनों पक्ष टेंशन कम करने की कोशिश में हैं।
समझौते का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक दोगुना करना है, जो वर्तमान में 191 अरब डॉलर है। भारत कृषि और डेयरी सेक्टर खोलने के अमेरिकी दबाव का विरोध कर रहा है, जबकि अमेरिका भारत के उच्च टैरिफ को कम करने पर जोर दे रहा है। ट्रंप ने हाल ही में यूरोपीय संघ से भी भारत-चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की मांग की थी, लेकिन अब टोन नरम हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा भारत की अर्थव्यवस्था को बूस्ट देगा, खासकर निर्यात क्षेत्र में। गोयल ने कहा कि फरवरी में मोदी-ट्रंप की बातचीत के बाद से चर्चा तेज हुई है। यदि नवंबर तक पहली ट्रेंच फाइनल हो जाती है, तो यह दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक होगा। हालांकि, रूसी तेल खरीद और टैरिफ जैसे मुद्दे अभी चुनौती बने हुए हैं। कुल मिलाकर, यह बातचीत भारत-अमेरिका संबंधों में नया मोड़ ला सकती है।
