गंगनहर की वार्षिक बंदी और हर की पौड़ी का नजारा: जलस्तर कम होने पर सिक्के और कीमती धातुएं तलाशने वालों की उमड़ती है भीड़
गंगनहर की वार्षिक बंदी और हर की पौड़ी का नजारा: जलस्तर कम होने पर सिक्के और कीमती धातुएं तलाशने वालों की उमड़ती है भीड़
हर साल दशहरे से लेकर दीपावली के बीच उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा गंग नहर के पानी को रोक दिया जाता है, जिसके तहत गंगा की साफ-सफाई और मेंटेनेंस का काम किया जाता है। हालांकि पानी रुकने से एक तरफ जहां हर की पौड़ी पर रौनक कम हो जाती है और तीर्थ पुरोहितों व दुकानदारों का कामकाज प्रभावित होता है, वहीं दूसरी तरफ यह अवधि कई गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए आजीविका का बड़ा जरिया बन जाती है।
इस वार्षिक बंदी से जुड़ी मुख्य बातें:
सिक्के और कीमती धातुओं की तलाश: सालभर श्रद्धालु आस्था के साथ गंगा में सिक्के और पूजा-पाठ से जुड़ी वस्तुएं अर्पित करते हैं। सामान्य दिनों में तेज धारा के कारण इन्हें निकालना असंभव होता है, लेकिन नहर बंद होने और जलस्तर घटने के बाद निचला हिस्सा दिखाई देने से लोग नदी में उतरकर सिक्के तलाशने लगते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सिक्कों के अलावा लोगों को सोने-चांदी की अंगूठियां और अन्य धातुएं भी मिलती हैं।
बड़ी संख्या में पहुंचते हैं लोग: हरिद्वार में गंगा बंदी के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से करीब एक हजार लोग सिक्के बीनने के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय युवक अमित कुमार ने बताया कि उनके जैसे कई लोगों के लिए यह सालभर में मिलने वाला एक ऐसा अवसर है, जिससे होने वाली कमाई से उनके घर के छोटे-मोटे खर्च पूरे होते हैं।
पुरोहितों और दुकानदारों की चिंता: पंडित संतोष पांडे और पंडित दीप अधिकारी जैसे तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि जब तक गंगा का प्रवाह रहता है, तब तक घाटों पर पूजा-पाठ, फूल-प्रसाद और माला बेचने वालों की रोजी-रोटी चलती है। लेकिन गंगा बंदी के दिनों में श्रद्धालुओं के अभाव से रौनक गायब हो जाती है, हालांकि यह समय गरीब तबके के लोगों के लिए वरदान साबित होता है।
जल आपूर्ति बहाल करने की तैयारी: अधिकारियों के अनुसार, हर की पौड़ी पर गंगाजल की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करने के लिए यूपी सिंचाई विभाग द्वारा बांध लगाने का काम तेजी से किया जा रहा है, ताकि जल्द ही श्रद्धालुओं के लिए स्नान के वास्ते पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जा सके।

